न्यायालय की भव्यता नहीं, न्याय तक आसान पहुंच अधिक महत्वपूर्ण : मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत

न्यायालय की भव्यता नहीं, न्याय तक आसान पहुंच अधिक महत्वपूर्ण : मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत
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-मुख्य न्यायाधीश ने मुख्यमंत्री के साथ गुरुग्राम में किया टॉवर ऑफ जस्टिस का लोकार्पण

गुरुग्राम। देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि न्यायालयों का वास्तविक महत्व उनकी भव्यता में नहीं, बल्कि इस बात में है कि वे नागरिक और न्याय के बीच की दूरी को कितना कम करते हैं।उन्होंने कहा कि गुरुग्राम का ‘टॉवर ऑफ जस्टिस’ इसी सोच का प्रतीक है और इससे न्यायिक क्षमता बढ़ने के साथ लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी।

रविवार को न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने गुरुग्राम में टॉवर ऑफ जस्टिस का उद्घाटन किया तथा वर्चुअल माध्यम से नूंह जिले के तावडू और पुन्हाना में नए न्यायिक परिसरों का शिलान्यास किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय शहरी आवास मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा सहित कई न्यायाधीश एवं गणमान्य उपस्थित रहे।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त न्यायिक परिसरों का निर्माण हरियाणा सरकार की संवेदनशीलता और न्यायिक अवसंरचना को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त न्यायालयों के निर्माण से अधिक मामलों की सुनवाई संभव होगी और विशेष रूप से वाणिज्यिक विवादों तथा परक्राम्य लिखत अधिनियम (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट) से जुड़े मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी।उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता सदैव ऐसी न्याय व्यवस्था का निर्माण होनी चाहिए जो दक्ष भी हो और निष्पक्ष भी। न्याय में गति आवश्यक है, परन्तु वह कभी भी संवैधानिक मूल्यों की कीमत पर प्राप्त नहीं की जा सकती।

इस परिसर में आधुनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तथा सुव्यवस्थित ज्यूडिशियल मालखाना जैसी सुविधाएँ भी विकसित की गई हैं। इस परियोजना की एक अन्य महत्त्वपूर्ण विशेषता प्रस्तावित इंटरनेशनल आर्बिटेशन सेंटर है जो उच्च न्यायालय के संरक्षण में संचालित होगा।

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसी न्यायपालिका का निर्माण है जो आधुनिक हो, किन्तु मानवीय भी हो, तकनीकी रूप से उन्नत हो, किन्तु संविधान के मूल्यों में दृढ़ता से निहित भी और प्रत्येक वाद के पीछे छिपे मानवीय जीवन को समझने वाली संवेदनशील संस्था भी बनी रहे। उन्होंने कहा हमारा उद्देश्य मामलों का शीघ्र निस्तारण करना तो है ही उसके साथ, हमारा प्रयास यह भी होना चाहिए कि कोई भी नागरिक आर्थिक, सामाजिक अथवा प्रक्रियागत कठिनाइयों के कारण स्वयं को न्याय से वंचित न महसूस करे।

उन्होंने कहा कि टावर ऑफ जस्टिस केवल एक भव्य इमारत न रहे, बल्कि प्रत्येक नागरिक के लिए निष्पक्ष, प्रभावी और संवेदनशील न्याय का प्रतीक बनेगा।जस्टिस सूर्यकांत व मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित अन्य गणमान्य ने टॉवर ऑफ जस्टिस निर्माण में अपना योगदान देने वाले श्रमिकों को स्मृति चिह्न भेंटकर उनका सम्मान किया।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आज का अवसर मेरे लिए विशेष है। जनवरी 2017 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहते हुए मुझे इस न्यायिक परिसर का भूमि-पूजन करने का अवसर मिला था। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम कभी मुख्यतः कृषि के लिए जाना जाता था, वह आज उद्योग, नवाचार और निवेश का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

आज गुरुग्राम की अदालतों में 24,000 से अधिक सिविल डिस्प्यूट, लगभग 1,000 कमर्शियल डिस्प्यूट तथा नेगोशियबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के एक लाख से अधिक मामले लंबित हैं। ये आँकड़े न्याय व्यवस्था पर बढ़ते दायित्व का संकेत हैं। ऐसे समय में यह टॉवर ऑफ जस्टिस केवल एक आधुनिक भवन नहीं है, बल्कि न्याय तक पहुँच को और अधिक प्रभावी बनाने का माध्यम है।

anand prakash

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