स्मार्ट बॉर्डर प्रणाली दुनिया की सबसे आधुनिक होगी : अमित शाह

स्मार्ट बॉर्डर प्रणाली दुनिया की सबसे आधुनिक होगी : अमित शाह
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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश की सीमा सुरक्षा व्यवस्था को स्मार्ट बॉर्डर की अवधारणा के अनुरूप दुनिया की सबसे आधुनिक प्रणाली बनाने की दिशा में काम कर रही है।अगले तीन वर्षों में मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क पर गंभीर प्रहार कर उस पर निर्णायक विजय हासिल की जाएगी, जबकि अवैध घुसपैठ को पूरी तरह रोकने के लिए मजबूत और एकीकृत सुरक्षा तंत्र विकसित किया जा रहा है।

शाह ने यहां सीमांत जिला पुलिस अधीक्षक सम्मेलन-2026 को संबोधित करते हुए कहा कि इस सम्मेलन ने सीमा सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण को संस्थागत स्वरूप प्रदान किया है। भविष्य में तटीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए भी इसी प्रकार समग्र रणनीति अपनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में सीमा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों, उनके समाधान तथा आवश्यक नीतिगत उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा बलों, राज्य एवं जिला प्रशासन, भारत सरकार के संबंधित विभागों तथा स्थानीय नागरिकों को साथ जोड़कर एक मजबूत चतुर्भुज सुरक्षा ग्रिड तैयार कर रही है। सुरक्षित सीमा, समृद्ध सीमावर्ती क्षेत्र और सतर्क समाज मिलकर ही देश की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश नक्सलवाद तथा जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में आतंकवाद जैसी चुनौतियों से काफी हद तक मुक्त हुआ है, जो सामूहिक प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पहले समस्याएं स्थायी और उनके समाधान अस्थायी हुआ करते थे, लेकिन वर्तमान सरकार समस्याओं की जड़ पर प्रहार कर स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है।

शाह ने कहा कि सरकार ने सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे पर निवेश में 400 प्रतिशत की वृद्धि की है और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ सीमा सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती गांवों में पलायन रोकने, रोजगार सृजन और सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए डेमोग्राफी मिशन के माध्यम से जनसंख्या संबंधी बदलावों का अध्ययन किया जाएगा, असामान्य कारणों की पहचान की जाएगी और उन्हें रोकने के उपाय सुझाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन का प्रमुख कारण अवैध घुसपैठ है और सरकार ऐसे अस्वाभाविक बदलावों पर कठोर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।गृह मंत्री ने कहा कि सरकार अलग-अलग सीमा चौकियों की व्यवस्था से आगे बढ़कर एकीकृत सुरक्षा ग्रिड विकसित कर रही है और जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष स्तर तक जनसांख्यिकीय बदलावों की सूचना समय पर पहुंचाने की व्यवस्था बनाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि भारत-म्यांमार सीमा पर 1,610 किलोमीटर लंबी फेंसिंग का कार्य लगभग 31,000 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य प्रॉक्सी युद्ध, अवैध घुसपैठ, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी, तस्करी, ड्रोन संबंधी खतरे, साइबर अपराध, संगठित अपराध और जनसांख्यिकीय असंतुलन पर प्रभावी रोक लगाना, सीमावर्ती क्षेत्रों को अधिक सुरक्षित और रहने योग्य बनाना तथा वहां से पलायन रोकना है।

सम्मेलन में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, बंदी संजय कुमार, केंद्रीय गृह सचिव, खुफिया ब्यूरो के निदेशक, सीमावर्ती राज्यों के पुलिस महानिदेशक तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

anand prakash

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