तकनीक का फायदा सभी को मिलना चाहिएः प्रधानमंत्री

तकनीक का फायदा सभी को मिलना चाहिएः प्रधानमंत्री
Facebook WhatsApp

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत का मानना है कि बदलाव के इस दौर में टेक्नोलॉजी का फायदा सभी को मिलना चाहिए। उन्होंने एआई का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे लोगों की जिंदगी बेहतर होनी चाहिए, पहुँच बढ़नी चाहिए, विकास को बढ़ावा मिलना चाहिए और हमें एक स्वस्थ ग्रह बनाए रखने में भी मदद मिलनी चाहिए।प्रधानमंत्री ने आज पेरिस में ‘वीवाटेक-2026’ में हिस्सा लिया और कहा कि भारत के लिए एआई का मतलब ‘सबका साथ’ (ऑल इनक्लूसिव) है। एआई कंट्री पार्टनर के तौर पर हमारी भागीदारी इसी सोच को दिखाती है।

टेक सम्मेलन में पिछली और मौजूदा भागीदारी के हालात की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय दुनिया कोविड-19 के संकट का सामना कर रही थी। आज दुनिया अलग तरह के बदलावों का अनुभव कर रही है। उन्होंने वीवा टेक-2021 के संदेश को दोहराया कि ‘जहाँ पारंपरिक तरीके काम नहीं आते, वहाँ इनोवेशन मदद कर सकता है।’

प्रधानमंत्री ने 2026 को भारत और यूरोप के लिए एक खास साल बताया। उन्होंने कहा कि साल की शुरुआत ऐतिहासिक भारत-ईयू (यूरोपीय संघ) मुक्त व्यापार समझौते के साथ हुई। यह समझौता हमारे व्यापार और निवेश को बढ़ाएगा और टैलेंट, टेक्नोलॉजी और टूरिज़्म के आदान-प्रदान के लिए कई रास्ते खोलेगा।उन्होंने कहा कि इस साल ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर’ की शुरुआत के साथ फ्रांस एक अहम पुल का काम कर रहा है। यह भारत और यूरोप के टेक इकोसिस्टम को करीब ला रहा है।

प्रधानमंत्री ने पिछले दशक में भारत की तकनीकी यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत बड़े पैमाने पर वित्तीय समावेशन, शिक्षा, टेलीमेडिसिन, खेती और अन्य क्षेत्रों में तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब आप फ्रांस में भी एफिल टॉवर या पेरिस एयरपोर्ट पर यूपीआई का इस्तेमाल कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पहचान सिस्टम को बनाने से लेकर दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म तक। हमारे यूपीआई की वजह से डिजिटल पेमेंट को देखें; आज दुनिया के आधे रियल-टाइम डिजिटल ट्रांज़ैक्शन भारत में होते हैं।”प्रधानमंत्री ने कहा कि “अंतरिक्ष तकनीक से लेकर नाभिकीय ऊर्जा तक, हम इंसानी क्षमता की सीमाओं का विस्तार कर रहे हैं। भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला देश बना और हाल ही में भारत के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी हासिल की। इसने हमें हमारे तीन-चरण वाले न्यूक्लियर विजन को साकार करने के करीब पहुँचाया है, जिसमें हमारे विशाल थोरियम भंडार का इस्तेमाल भी शामिल है।”

anand prakash

Related articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page