राष्ट्रपति ने 15 नर्सिंग कर्मियों को फ्लोरेंस नाइटिंगेल से किया सम्मानित

राष्ट्रपति ने 15 नर्सिंग कर्मियों को फ्लोरेंस नाइटिंगेल से किया सम्मानित
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नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार प्रदान किए।इस वर्ष देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 15 नर्सिंग कर्मियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए चुना गया है।

राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि नर्सिंग कर्मी सेवा के उच्चतम मानकों का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा पेशेवर करुणा और समर्पण के साथ राष्ट्र की सेवा करते हैं तथा कई बार अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी रोगियों की देखभाल सुनिश्चित करते हैं।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा, “यह अवसर उन नर्सिंग कर्मियों और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के अमूल्य योगदान के प्रति उपयुक्त श्रद्धांजलि है, जो करुणा और अटूट समर्पण के साथ राष्ट्र की सेवा करते हैं। मैं सभी पुरस्कार विजेताओं की कर्तव्य के प्रति प्रेरणादायक निष्ठा और रोगी देखभाल के उच्चतम मानकों को बनाए रखने में उनके अथक प्रयासों की सराहना करती हूं।”

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कारों की स्थापना वर्ष 1973 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा नर्सिंग क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाओं को मान्यता देने के उद्देश्य से की गई थी। यह पुरस्कार देश में नर्सिंग पेशे का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान माना जाता है।

इस वर्ष पुरस्कार प्राप्त करने वालों में एएनएम श्रेणी में लद्दाख से कुलविंदर परही, महाराष्ट्र से उज्वला महादेव सोयम, मिजोरम से लालेनथांगी नामटे, सिक्किम से मधु माला गुरूंग, उत्तराखंड से पूजा परमार राणा और पश्चिम बंगाल से गीता कर्माकर शामिल हैं।

नर्स श्रेणी में चंडीगढ़ से पूनम वर्मा, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव से दीपा बीजू, दिल्ली से डॉ. श्रवण कुमार ढाका, गोवा से रक्षा रूपो पर्वतकर, कर्नाटक से कविता जगन्नाथ, केरलम से मंजू मोल वी.एस., लक्षद्वीप से आयशा बीबी के, तमिलनाडु से प्रोफेसर (डॉ.) आर. शंकर शानमुगम तथा सेना मुख्यालय (आईएचक्यू, रक्षा मंत्रालय), दिल्ली से मेजर जनरल लिस्सम्मा पी.वी. को सम्मानित किया गया।

anand prakash

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