राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान विपक्ष के हंगामे पर सत्ता पक्ष ने उठाए सवाल, कांग्रेस ने बताया रस्म आदायगी

राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान विपक्ष के हंगामे पर सत्ता पक्ष ने उठाए सवाल, कांग्रेस ने बताया रस्म आदायगी
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नई दिल्ली। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान विपक्षी सांसदों के हंगामा करने को आड़े हाथों लिया। उन्होंने विपक्षी सदस्यों के हंगामे पर नाराजगी जाहिर करते हुए विपक्ष की सोच पर सवाल उठाए।संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने यहां संसद भवन में अपने चैंबर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जब वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर जब सदन में चर्चा की जा रही थी, गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस पर जब चर्चा की जा रही थी, बाबा साहेब अंबेडकर की 150वीं जयंती पर जब चर्चा हुई या भूपेन हजारिका के शताब्दी समारोह पर जब चर्चा की जा रही थी, तब विपक्ष ने सदन में हंगामा किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हस्तियों और प्रतीकों का अपमान देश कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। ये सब इतने महत्वपूर्ण विषय हैं जिन पर सभी को सम्मान देना चाहिए।

केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रपति महान गुरुओं और राष्ट्रीय प्रतीकों का उल्लेख कर रही थीं, तब विपक्ष ने सुनने के बजाय नारेबाजी की।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने राष्ट्रपति के अभिभाषण की तारीफ करते हुए कहा कि इसमें सरकार की 11 वर्षों की उपलब्धियों और गरीब कल्याण योजनाओं का विस्तार से उल्लेख है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना है और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।

दूसरी तरफ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राष्ट्रपति के भाषण को रस्म अदायगी करार दिया और कहा कि इसमें कोई ठोस लक्ष्य या जवाबदेही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार गरीब-विरोधी है और मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का नारा केवल खोखला है, जिसमें न तो कोई टाइमलाइन है और न ही कोई ठोस परिणाम।

राजद नेता मनोज झा ने भी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि देश की चुनौतियां राष्ट्रपति के भाषण का हिस्सा नहीं हैं तो यह सरकार की सोच को दर्शाता है। उन्होंने विकसित भारत-ग्राम कानून को किसान बिल की तरह वापस लेने की मांग की और कहा कि सरकार नगर पालिका से आगे सोच ही नहीं पा रही है।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि बार-बार वही वादे दोहराए गए हैं जिनका धरातल पर कोई असर नहीं है। सरकार केवल पुराने दावों को दोहराती है लेकिन जनता की समस्याओं का समाधान नहीं करती।

कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय मुद्दों पर सहमति बनाने की बात कही, जिसका स्वागत है। संविधान की रक्षा और वोट चोरी रोकना आज सबसे बड़ा मुद्दा है। लेकिन एसआईआर के माध्यम से करोड़ों लोगों के वोट काटे जा रहे हैं और लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने अभिभाषण में विकसित भारत-ग्राम कानून का जिक्र किया, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। इस पर एनडीए सांसदों ने तालियां बजाईं, जबकि विपक्षी सांसदों ने विरोध जताते हुए कानून वापस लेने की मांग की।

anand prakash

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