नमामि गंगे मिशन ने 5 नई परियोजनाएं की शुरू

नमामि गंगे मिशन ने 5 नई परियोजनाएं की शुरू
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नई दिल्ली। नदियों को प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, ‘नमामि गंगे मिशन’ ने अपनी प्रगति को और गति दी है। मिशन के दूसरे चरण के तहत, वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में 5 नई और बड़ी सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं को सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया है।इन परियोजनाओं से नदियों की सफाई के प्रयासों को अभूतपूर्व बल मिलेगा।

जल शक्ति मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, इस वित्तीय वर्ष में अब तक 9 परियोजनाएं चालू की जा चुकी हैं, जिससे प्रमुख शहरी केंद्रों में सीवेज उपचार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ये परियोजनाएं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) हैं। ये ऐसी फैक्ट्रियां होती हैं जो शहरों के गंदे पानी (सीवेज) को नदी में छोड़ने से पहले उसे साफ करती हैं।

इन 5 नई परियोजनाओं के चालू होने के साथ, नमामि गंगा कार्यक्रम के तहत चालू की गई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की कुल क्षमता बढ़कर 3,976 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) तक पहुंच गई है। इसके अलावा, चालू किए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की कुल संख्या अब 173 हो गई है। इन परियोजनाओं के चालू होने से विभिन्न राज्यों में प्रदूषण नियंत्रण और नदी पुनर्जीवन प्रयासों को एक महत्वपूर्ण मजबूती मिली है।

उत्तर प्रदेश के शुक्लागंज (गंगा) में 65 करोड़ रुपये की लागत से 5 एमएलडी क्षमता वाला प्लांट चालू किया गया है, जिससे 3 लाख लोगों को लाभ मिलेगा। शहर आगरा स्थित यमुना को साफ करने के लिए कुल 842 करोड़ रुपये की लागत से 31 एमएलडी और 35 एमएलडी क्षमता के दो बड़े प्लांट शुरू हुए। इससे आगरा के लगभग 25 लाख लोगों को लाभ होगा। वहीं, वाराणसी स्थित गंगा के लिए 55 एमएलडी क्षमता का एक प्लांट चालू हुआ, जो लगभग 18 लाख लोगों की मदद करेगा।

इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के उत्तरी बैरकपुर स्थित गंगा की सफाई के लिए 30 एमएलडी क्षमता का एक नया प्लांट शुरू हुआ, जो गंगा में प्रदूषण को रोकेगा। इसके लिए 154 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना से करीब 2.2 लाख लोग लाभान्वित होंगे।

बिहार की राजधानी पटना के कंकड़बाग स्थित गंगा की सफाई के लिए पहले से चल रहे एक प्लांट की क्षमता 15 एमएलडी से बढ़ाकर अब 30 एमएलडी कर दिया गया है।

इससे पहले, दूसरी तिमाही तक, उधम सिंह नगर (उत्तराखंड), मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश), महेशतला (पश्चिम बंगाल) और जंगीपुर (पश्चिम बंगाल) में परियोजनाएं चालू हो चुकी हैं।

उल्लेखनीय है कि इससे अब शहरों का बहुत सारा अनुपचारित गंदा पानी सीधे गंगा और यमुना में नहीं जाएगा नदियों का प्रदूषण कम होगा, जिससे वे पहले से अधिक साफ होंगी तथा शहरों में सीवेज के प्रबंधन में सुधार आएगा।

anand prakash

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