पूर्वी चंपारण जिले में अर्णब तूफान का व्यापक असर,खेतों में गिरी धान की तैयार फसल, किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी

पूर्वी चंपारण जिले में अर्णब तूफान का व्यापक असर,खेतों में गिरी धान की तैयार फसल, किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी
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मोतिहारी। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्णब’ का असर पूर्वी चंपारण जिले में साफ तौर पर दिखने लगा है। पिछले दो दिनों से हो रही रुक-रुक कर बारिश और तेज हवाओं के कारण जिले के विभिन्न प्रखंडों में धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।

खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसलें तेज हवा के झोंकों से जमीन पर गिर गई हैं, जिससे किसानों के चेहरे पर मायूसी छा गई है। इस साल बेहतर मॉनसून के कारण किसानों को बंपर पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन ऐन वक्त पर आए इस प्राकृतिक संकट ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

दरअसल, जिले के अधिकांश हिस्सों में धान की फसल इस समय पूरी तरह तैयार हो चुकी है और कई जगहों पर कटनी भी चल रही थीं। बारिश और तेज हवा के कारण फसल के खेतों में सो जाने से बालियों से दाने झड़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, खेतों में जलजमाव होने से गिरी हुई फसलों में नमी बढ़ेगी, जिससे अनाज की गुणवत्ता खराब होने और सड़ने की आशंका बढ़ गई है।

बंजरिया प्रखंड के किसान रामविनय सिंह,अभिलाष कुमार व रविन्द्र सिंह का कहना है कि साल भर खून-पसीना बहाकर फसल तैयार की थी। इस बार पैदावार बहुत अच्छी थी। सोचा था दिवाली पर फसल बेचकर केसीसी का लोन चुकता करेगे,और गन्ना और तेलहनी खेती की तैयारी करेगे,लेकिन असमय बारिश ने सब बर्बाद कर दिया। अब तो खाने के लिए चावल तो खरीदना तो पड़ेगा ही अगामी खेती भी प्रभावित होगी।

वही आदापुर प्रखंड के किसान रामेशवर यादव ने कहा कि सरकार को तुरंत नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा देना चाहिए। वहीं कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि यह मौसम धान की कटाई का है। ऐसे में जिन किसानों ने फसल काट ली है, वे उसे तुरंत सुरक्षित और सूखे स्थानों पर रखें। खुले में रखे अनाज को तिरपाल से ढकें। भंडारण से पहले दानों को अच्छी तरह सुखा लें ताकि नमी के कारण फंगस न लगे।खेतों में जलजमाव होने पर पानी निकालने का तुरंत प्रबंध करें।

चक्रवात के कारण हुए इस औचक नुकसान से परेशान किसान अब सरकार और जिला प्रशासन से मुआवजे की गुहार लगा रहे हैं। किसानों का कहना है कि बीज, खाद और जुताई के लिए उन्होंने बैंकों और सहकारी समितियों से कर्ज लिया था। अगर सरकार ने जल्द ही फसलों के नुकसान का आकलन कराकर आर्थिक सहायता नहीं दी, तो उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

anand prakash

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