चलती ट्रेन में गूंजी नवजात की किलकारी, प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा दोनो सुरक्षित

चलती ट्रेन में गूंजी नवजात की किलकारी, प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा दोनो सुरक्षित
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चकिया। अमृतसर से मुजफ्फरपुर जा रही गर्भवती महिला को ट्रेन में तेज प्रसव पीड़ा उठने के बाद महिला यात्रियों ने सुरक्षित डिलीवरी कराई। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ बताया जाता है।

शारदीय नवरात्र के दौरान चकिया रेलवे स्टेशन पर मानवता और संवेदनशीलता की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने लोगों का दिल जीत लिया। अमृतसर से मुजफ्फरपुर जा रही एक गर्भवती महिला को ट्रेन में अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। ऐसे में ट्रेन में मौजूद महिला यात्रियों ने आगे बढ़कर उसकी मदद की और बच्चे का जन्म हुआ।

वहीं, सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए एंबुलेंस की व्यवस्था की और प्रसूता तथा नवजात को अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों के अनुसार, मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। दरअसल, शिवहर जिले के पिपराही थाना क्षेत्र के कलुआ टिकहा गांव, वार्ड संख्या 14 निवासी शिवेश कुमार अपनी गर्भवती पत्नी अंजलि कुमारी के साथ ट्रेन संख्या 15212 से अमृतसर से मुजफ्फरपुर की यात्रा कर रहे थे। रविवार की सुबह जब ट्रेन चकिया रेलवे स्टेशन पहुंचने वाली थी, तभी अंजलि कुमारी को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ट्रेन में मौजूद एक यात्री ने तत्काल रेलवे पुलिस को इसकी सूचना दी।

सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस हरकत में आई। उपनिरीक्षक राजेश कुमार झा ने कांस्टेबल योगेन्द्र यादव, जीआरपी और सीएए के साथ ट्रेन को अटेंड किया। इस दौरान ट्रेन में मौजूद महिला यात्रियों ने प्रसव पीड़ा से जूझ रही अंजलि की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। यात्रियों के सहयोग और मानवीय संवेदनशीलता के बीच महिला ने बच्चे को जन्म दिया। नवजात की किलकारी गूंजते ही दंपति के चेहरे पर खुशी छा गई और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

बच्चे के जन्म के बाद रेलवे पुलिस ने बिना देर किए एंबुलेंस की व्यवस्था की। इसके बाद प्रसूता अंजलि कुमारी और नवजात शिशु को चकिया अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने दोनों की स्वास्थ्य जांच की। डॉक्टरों के अनुसार, मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। फिलहाल अस्पताल में दोनों को आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस पूरे वाकया के दौरान महिला की गरिमा और निजता का ध्यान रखते हुए जरूरी सहायता उपलब्ध कराई गई। आपात स्थिति में यात्री द्वारा समय पर सूचना देना, रेलवे पुलिस की तत्परता और महिला यात्रियों का सहयोग सराहनीय रहा। सभी के सामूहिक प्रयास से प्रसूता और नवजात को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सकी। चकिया रेलवे स्टेशन पर सामने आई यह घटना बताती है कि मुश्किल समय में इंसानियत और आपसी सहयोग सबसे बड़ी ताकत बन जाते हैं।

रेलवे पुलिस की तत्परता और महिला यात्रियों की संवेदनशीलता ने एक परिवार के लिए इस पल को यादगार बना दिया। नवरात्र के पावन अवसर पर मानवता की यह मिसाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

anand prakash

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