त्योहारी सीजन में महंगाई का तड़का, चीनी के भाव में उबाल, दाल और तेल के भी तेवर कड़े

त्योहारी सीजन में महंगाई का तड़का, चीनी के भाव में उबाल, दाल और तेल के भी तेवर कड़े
Facebook WhatsApp

मोतिहारी। त्योहारों का सीजन दस्तक दे रहा है, लेकिन महंगाई ने आम आदमी की खुशियों पर एक बार फिर ग्रहण लगाना शुरू कर दिया है। मिठास के इस त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों में आए अप्रत्याशित उछाल ने न सिर्फ रसोई का बजट बिगाड़ दिया है, बल्कि लोगों के मुंह का जायका भी कड़वा कर दिया है।

चीनी के साथ-साथ दाल, सरसों तेल और चना के भाव में भी लगातार तेजी देखी जा रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। मोतिहारी की थोक मंडी और खुदरा बाजार के बीच कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। इस अंतर का सीधा बोझ उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।

थोक बाजार में चीनी करीब 60 रुपया प्रति जबकि खुदरा बाजार में चीनी 65 से 70 रुपये किलो मिल रहा है। जिसके कारण मिठाइयों और पकवानों की तैयारी महंगी हुई है। वहीं सभी दलहन की कीमतों में 5 से 10 रुपया प्रति किलो का उछाल आया है। वहीं सरसों तेल और चना की कीमतों में लगातार तेजी के संकेत देखे जा रहे हैं।

थोक मंडी के व्यवसायियो का कहना है, त्योहारों के समय मांग बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन इस बार पीछे से ही माल महंगा आ रहा है। सावन के महीने में भी चीनी के तेवर कड़े थे, और अब त्योहारी सीजन में आपूर्ति प्रभावित होने और लागत बढ़ने के कारण चीनी का थोक भाव 60 रुपये तक पहुंच गया है। जब हमें ही माल महंगा मिलेगा, तो खुदरा बाजार में कीमतें बढ़ना तय है।

दाल और सरसों तेल के दामों में भी तेजी के संकेत हैं, जिससे बाजार में खरीदार बजट संभालकर चल रहे हैं। कई घरो की गृहिणियो ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, महंगाई ने घर का पूरा बजट तहस-नहस कर दिया है। त्योहारों में मेहमानों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन अब चाय-पानी की पारंपरिक मेहमान नवाजी पर भी भारी खर्च बैठ रहा है। हालात ये हैं कि सुबह की बेड टी में कटौती करनी पड़ रही है। चीनी, दाल और तेल जैसी बुनियादी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। पहले से ही मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए रसोई चलाना चुनौतीपूर्ण था, अब त्योहारों की खुशी मनाने के लिए भी हर एक रुपये का हिसाब लगाना मजबूरी बन गया है।

उल्लेखनीय है कि दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहारों के ठीक पहले खाद्य पदार्थों के दामों में आई यह तेजी घरेलू बजट पर भारी दबाव बना रही है। त्योहारी सीजन में खानपान से लेकर घरेलू खर्च वैसे ही बढ़ जाते हैं; ऐसे में आम जनता के बीच अब यही बड़ा सवाल तैर रहा है कि बाजार की इस बेलगाम महंगाई पर प्रशासन कब लगाम लगाएगा और आम लोगों को राहत कब मिलेगी?

anand prakash

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page