रक्षा मंत्री ने विशाखापट्टनम में लॉन्च किया पहला फ्लीट सपोर्ट शिप ‘सूर्या’

रक्षा मंत्री ने विशाखापट्टनम में लॉन्च किया पहला फ्लीट सपोर्ट शिप ‘सूर्या’
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विशाखापट्टनम को बड़े मैरीटाइम इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित करने का आह्वान

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को विशाखापट्टनम के हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में पहला फ्लीट सपोर्ट शिप ‘सूर्या’ लॉन्च किया।इसके अलावा दूसरे फ्लीट सपोर्ट शिप एफएसएस-5 की कील रखी और अपग्रेडेड स्लिपवे-4 एवं 300 टन के गोलियथ क्रेन का उद्घाटन किया। ये भारत की स्वदेशी शिपबिल्डिंग क्षमता मजबूत करने और भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल पहुंच एवं सहनशीलता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। रक्षा मंत्री ने विशाखापट्टनम को बड़े मैरीटाइम इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित करने का आह्वान किया और भारतीय शिपयार्ड से आत्मनिर्भरता से आगे बढ़कर वैश्विक प्रतिस्पर्धा की ओर बढ़ने का आग्रह किया।

इस मौके पर रक्षा मंत्री ने कहा कि इन तीनों माइलस्टोन का महत्व अलग-अलग उपलब्धियों से कहीं ज़्यादा है। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड न केवल अपनी जहाज बनाने की क्षमता को मजबूत कर रहा है, बल्कि भारत की समुद्री ताकत की नींव भी मजबूत कर रहा है। उन्होंने 1948 में विशाखापट्टनम में आजाद भारत में बने पहले जहाज ‘जला उषा’ की लांचिंग को याद करते हुए भारत की पुरानी समुद्री विरासत पर जोर देते हुए कहा कि देश का समुद्र से रिश्ता बहुत पुराने समय से है। उन्होंने आठ दशकों से ज्यादा समय से देश की समुद्री और रक्षा जरूरतों में इसके योगदान की तारीफ की।

फ्लीट सपोर्ट शिप प्रोग्राम के बारे में रक्षा मंत्री ने कहा कि ये जहाज हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की पहुंच, ताकत और ऑपरेशनल असर को मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि दूर के समुद्री इलाकों में लंबे समय तक काम करने वाली नेवी को न सिर्फ जंगी जहाज चाहिए, बल्कि लॉजिस्टिक्स, मेंटेनेंस, लगातार सपोर्ट और ऑपरेशनल ताकत भी चाहिए। फ्लीट सपोर्ट शिप्स समुद्र में सामान भरकर और नेवी के ऑपरेशन्स को लगातार सपोर्ट देकर यह जरूरी क्षमता देते हैं। रक्षा मंत्री ने शिप ‘सूर्या’ के लॉन्च को नेवी की ऑपरेशनल पहुंच और ताकत को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया, जबकि एफएसएस-5 की कील लेइंग भारत के समुद्री भविष्य के लिए एक और मजबूत नींव है।

उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव आया है, जिसमें एडवांस्ड सिस्टम और प्लेटफॉर्म के घरेलू डिजाइन और मैन्युफैक्चरर पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने समय पर डिलीवरी, प्रोडक्टिविटी, स्वदेशी डिज़ाइन क्षमता, सप्लाई चेन में लचीलापन, स्किल्ड मैनपावर, क्षमता और लागत कॉम्पिटिटिवनेस को ऐसे खास एरिया के रूप में पहचाना जो भारत की शिपबिल्डिंग क्षमता को ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस में बदलने की क्षमता तय करेंगे।

इस कार्यक्रम में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, आंध्र प्रदेश के सड़क, बिल्डिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास मंत्री जनार्दन रेड्डी, विशाखापट्टनम के सांसद श्रीभारत मथुकुमिल्ली, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला, पूर्वी समुद्र तट के तटरक्षक कमांडर एडिशनल डायरेक्टर जनरल डॉनी माइकल, हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रियर एडमिरल सी रघुराम (रिटायर्ड) और भारतीय नौसेना और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

anand prakash

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