नेपाल में तेजी से फैल रहा स्क्रब टाइफस, इस साल अब तक 9,872 संक्रमित, 22 की मौत

नेपाल में तेजी से फैल रहा स्क्रब टाइफस, इस साल अब तक 9,872 संक्रमित, 22 की मौत
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काठमांडू। नेपाल के इनर मधेश के जिलों को दहला चुका स्क्रब टाइफस देशभर में फैल गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 से शनिवार तक नेपाल में 9,872 लोग स्क्रब टाइफस से संक्रमित पाए गए हैं।महामारी विज्ञान एवं रोग नियंत्रण महाशाखा के रोग निगरानी एवं अनुसंधान शाखा के प्रमुख हेमराज पाण्डे के अनुसार, डोल्पा, मनांग और मुगु को छोड़कर 74 जिलों में संक्रमण की पुष्टि हुई है।

इस अवधि में स्क्रब टाइफस से 22 लोगों की मौत हो गई। हालांकि, इन सभी मौतों की वजह स्क्रब टाइफस ही था या नहीं, इसकी पुष्टि अभी बाकी है और जांच जारी है। स्क्रब टाइफस से सबसे ज्यादा प्रभावित सल्यान जिले के दार्मा पहुंचे पाण्डे ने बताया कि खेती के मौसम में किलनी (माइट) सक्रिय हो जाती हैं और चिगास माइट के लार्वा की संख्या बढ़ जाती है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में इसका इलाज आसानी से और मुफ्त उपलब्ध है, लेकिन सल्यान में मौतों की संख्या अधिक होने के कारण इसके कारणों का अध्ययन किया जा रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान में फैलने वाला स्क्रब टाइफस नेपाल में 1981 में सामने आया था। वर्ष 2015 के भूकंप के बाद नेपाल में इसके संक्रमण में वृद्धि देखी गई है।शुरुआती वर्षों में यह बीमारी चितवन, नवलपरासी समेत तराई के जिलों में अधिक सक्रिय थी, लेकिन हाल के वर्षों में इसका प्रसार पहाड़ी और हिमाली जिलों तक हो गया है।

महाशाखा के कीटजनित रोग शाखा के प्रमुख डॉ. गोकर्ण दाहाल के अनुसार, स्क्रब टाइफस करीब पांच साल पहले ही पहाड़ी जिलों तक पहुंच चुका था। उन्होंने कहा कि पहले यह बीमारी तराई और इनर मधेश में ज्यादा देखी जाती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पहाड़ी क्षेत्रों में भी मरीजों की संख्या बढ़ी है।

डॉ. दाहाल ने कहा कि बीमारी का जोखिम बढ़ रहा है, हालांकि समय पर उपचार मिलने पर मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है और इससे मृत्यु दर कम है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आर्थिक वर्ष 2023 में 9,330, 2024 में 11,500 और 2025 में करीब 7,300 लोगों में स्क्रब टाइफस का संक्रमण पाया गया था। चालू वर्ष के शुरुआती महीनों में ही 5,500 से अधिक मामले सामने आने के कारण अनुमान लगाया जा रहा है कि मार्च तक संक्रमितों की संख्या करीब 11 हजार तक पहुंच सकती है।

डॉ. दाहाल के मुताबिक, स्क्रब टाइफस बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है और इसके इलाज की दवाएं आसानी से उपलब्ध हैं। लेकिन मरीजों के अस्पताल पहुंचने में देरी करने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। उन्होंने कहा कि इस बार सल्यान में अचानक इतने अधिक मामले और मौतें क्यों हुईं, इसका पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की टीम अध्ययन कर रही है।

anand prakash

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