यूपीएससी चयन प्रक्रिया में भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बदलाव जरूरी : मोदी

यूपीएससी चयन प्रक्रिया में भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बदलाव जरूरी : मोदी
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की चयन प्रक्रिया को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालने पर जोर देते हुए कहा कि भर्ती परीक्षा में केवल उम्मीदवार का ज्ञान ही नहीं बल्कि यह भी परखा जाना चाहिए कि वह सिविल सेवा में क्यों आना चाहता है।उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए ‘नेशन फर्स्ट’ और ‘सिटीजन फर्स्ट’ चयन की प्रमुख कसौटी होनी चाहिए।

यूपीएससी के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भारत मंडपम में आयोजित शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि 2047 का भारत आज के भारत से बहुत अलग होगा। भारत अधिक शहरी होगा, गांव और शहरों के बीच अंतर कम होगा तथा युवाओं की आकांक्षाएं और अपेक्षाएं कहीं अधिक बड़ी होंगी। ऐसे में सार्वजनिक सेवाओं को भी आज की त्वरित सेवा वाली दुनिया की गति के अनुरूप काम करना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता हजारों दस्तावेजों को कुछ ही क्षणों में संसाधित कर सकती है और सरकार के पास वास्तविक समय का आंकड़ा उपलब्ध है तो नागरिक भी तेजी से समाधान चाहता है। इसलिए चयन के मानकों और भर्ती प्रक्रिया को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे युवाओं को सार्वजनिक सेवा में लाना जरूरी है जो सरकारी पद से नहीं बल्कि जनसेवा से आकर्षित हों।

मोदी ने कहा कि 21वीं सदी के भारत की कार्य संस्कृति का मूल सिद्धांत ‘प्रो पीपल, प्रोएक्टिव गुड गवर्नेंस’ होना चाहिए। सरकार को नागरिकों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए काम करना चाहिए और समस्या सामने आने का इंतजार करने के बजाय उसका पहले से अनुमान लगाकर समाधान तैयार करना चाहिए। उन्होंने ‘नागरिक देवो भव’ का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिक की सेवा सर्वोपरि है।उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में सिविल सेवकों के सामने सूचना युद्ध, डीपफेक, एल्गोरिद्मिक पक्षपात और जलवायु न्याय जैसे नए और जटिल सवाल होंगे। इसलिए चयन प्रक्रिया में जटिल समस्याओं को सुलझाने की क्षमता और दूरदृष्टि को परखने को प्राथमिकता देनी होगी।

प्रधानमंत्री ने परीक्षा प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षा को केवल एक आयोजन नहीं समझना चाहिए क्योंकि यह युवाओं के भविष्य और उनके जीवन से जुड़ी है। परीक्षा में कुछ महीनों की देरी से कोचिंग फीस, किराये और परिवहन का खर्च बढ़ता है और परिवारों पर बोझ पड़ता है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को ‘टाइम सर्टेनिटी’ के सिद्धांत को अपनाना चाहिए और मानकों से समझौता किए बिना परीक्षा चक्र को छोटा करना चाहिए। मोदी ने कहा कि यूपीएससी ने परीक्षा चक्र में करीब 100 दिन की कमी की है।

प्रधानमंत्री ने यूपीएससी और राज्य लोक सेवा आयोगों के बीच बेहतर समन्वय तथा श्रेष्ठ प्रक्रियाओं को साझा करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सम्मेलन को अधिक उत्पादक बनाने के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर की बेहतर कार्यप्रणालियों का अध्ययन किया जाना चाहिए तथा प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रक्रियाओं की दक्षता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने प्रक्रियाओं और मानकों को मानकीकृत करने तथा आयोगों की क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया।मोदी ने कहा कि यूपीएससी के गठन के समय बड़े शहरों, समर्थ परिवारों और बड़े संस्थानों से पढ़े युवाओं को अवसरों का अधिक लाभ मिलता था लेकिन अब गांवों और कस्बों के युवा भी सार्वजनिक सेवा में पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ी है। 1952 में सिविल सेवाओं में महिला उम्मीदवारों की हिस्सेदारी करीब तीन प्रतिशत थी, जो अब 30 प्रतिशत से अधिक हो गई है।

उन्होंने कहा कि 1976 में यूपीएससी के 50 वर्ष पूरे होने के समय की तुलना में आज परीक्षा देने वालों की संख्या 45 गुना से अधिक बढ़ चुकी है। इतने बड़े प्रतिभा समूह के बीच सही व्यक्ति का चयन आयोगों की बड़ी जिम्मेदारी है क्योंकि चयनित अधिकारी आगे चलकर जमीनी स्तर पर सरकार के प्रतिनिधि के रूप में काम करते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यूपीएससी ने अपने पहले 100 वर्षों में अपनी विश्वसनीयता मजबूत की है और अब दूसरी सदी में नई संभावनाओं तथा चुनौतियों के अनुरूप इसे और समृद्ध करना होगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता, निष्पक्षता, योग्यता, गोपनीयता और निष्पक्ष प्रक्रिया यूपीएससी की पहचान हैं और इन मूल्यों को हमेशा बनाए रखना चाहिए।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने यूपीएससी की 100 वर्ष की यात्रा पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा शताब्दी स्मारक सिक्का, डाक टिकट और ‘100 महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय’ पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। यूपीएससी की स्थापना 01 अक्टूबर 1926 को हुई थी।

समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने हाल में एक विमान में हुई घटना के दौरान भारतीय कैप्टन स्मित के साहस और सूझबूझ की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके साहस ने हर देशवासी को गौरवान्वित किया है और देशवासियों से उनके अच्छे स्वास्थ्य तथा दीर्घायु के लिए प्रार्थना करने की अपील की।

anand prakash

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