भागलपुर में गंगा का तांडव,अस्तित्व बचाने की जंग में राघोपुर सरपंच का आमरण अनशन शुरू
भागलपुर। जिले के खरीक प्रखंड अंतर्गत राघोपुर इलाके में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर और तेज होते कटाव ने भयावह स्थिति पैदा कर दी है। गंगा की तेज धार चौबीसों घंटे जमीन को अपनी आगोश में ले रही है, जिससे ग्रामीणों के आशियाने, खेत और भविष्य पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
प्रशासन की सुस्ती से नाराज होकर और ग्रामीणों के अस्तित्व की रक्षा के लिए राघोपुर पंचायत के सरपंच प्रमोद मंडल आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। अनशन पर बैठे सरपंच प्रमोद मंडल ने सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सीधी गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि मुख्यमंत्री राघोपुर पहुंचकर सड़क मार्ग से कटाव प्रभावित इलाकों का जायजा लें।
सरपंच ने तीखे शब्दों में कहा, केवल हवाई सर्वेक्षण से जमीन पर मौजूद इस भयावह स्थिति का सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। जब तक मुख्यमंत्री खुद ग्रामीणों के बीच नहीं आएंगे, तब तक उन्हें यह अहसास नहीं होगा कि गंगा का कटाव किस तेजी से लोगों की जिंदगी की कमाई और आशियाने को निगल रहा है।
सरपंच ने भावुक होते हुए सरकार और प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक मुख्यमंत्री खुद राघोपुर आकर स्थिति की समीक्षा नहीं करते, उनका आमरण अनशन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, यह लड़ाई सिर्फ मेरी व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, बल्कि पूरे राघोपुर के अस्तित्व की लड़ाई है।
मुख्यमंत्री जब तक यहां नहीं आएंगे, मैं अन्न-जल ग्रहण नहीं करूंगा। चाहे मेरी जान ही क्यों न चली जाए, लेकिन ग्रामीणों की आवाज दबने नहीं दूंगा। इलाके में दहशत का माहौल इस कदर है कि लोग रात-रात भर जागकर नदी की लहरों पर नजर रख रहे हैं। सरपंच और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कटाव प्रभावित क्षेत्रों में फ्लड फाइटिंग का काम दिन-रात यानी 24 घंटे चलाया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय गंगा का बहाव और तेज हो जाता है। अगर रात में काम बंद रहता है, तो दिनभर की गई मेहनत और सरकारी संसाधन तेज धार में बह जाते हैं। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए युद्धस्तर पर काम करना बेहद जरूरी है, वरना पूरा राघोपुर गांव गंगा में विलीन हो जाएगा।

