अमेरिका से जैवलिन एंटी टैंक मिसाइल खरीदेगा भारत, समझाैते पर हस्ताक्षर किये

अमेरिका से जैवलिन एंटी टैंक मिसाइल खरीदेगा भारत, समझाैते पर हस्ताक्षर किये
Facebook WhatsApp

नई दिल्ली। भारत ने अमेरिका से टैंक रोधी मिसाइल प्रणाली एफजीएम-148 जैवलिन खरीदने का समझौता किया है।अमेरिकी राजदूतावास की प्रवक्ता डाना जिए ने शुक्रवार को यहां कहा, हम पुष्टि कर सकते हैं कि भारत ने जैवलिन प्रणाली के लिए प्रस्ताव और स्वीकृति पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान में कहा, अमेरिका, अमेरिकी विदेशी सैन्य बिक्री प्रक्रिया के तहत जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल प्रणाली की खरीद के लिए लेटर ऑफ ऑफर एंड एक्सेप्टेंस (एलओए) पर भारतीय सेना के हस्ताक्षर का स्वागत करता है। यह उपलब्धि अमेरिकी और भारतीय सशस्त्र बलों के बीच स्थायी साझेदारी को दर्शाती है और अमेरिकी तथा भारतीय रक्षा उद्योगों के बीच भविष्य में सहयोग का मार्ग प्रशस्त करती है।

समझाैते पर हस्ताक्षर के साथ, भारत जैवलिन प्रणाली का ग्राहक बन गया है, जो एक उन्नत, मध्यम दूरी की फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है। जैवलिन का उपयोग अमेरिकी सेना, अमेरिकी मरीन कॉर्प्स और कई अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों द्वारा किया जाता है तथा इसे बख्तरबंद वाहनों और सुदृढ़ ठिकानों सहित विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों के विरुद्ध उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है।

जैवलिन प्रणाली का उत्पादन जैवलिन संयुक्त उपक्रम द्वारा किया जाता है, जो आरटीएक्स और लॉकहीड मार्टिन की साझीदारी है।इससे पहले अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की कि भारत युद्ध में परखी जा चुकी एफजीएम-148 जैवलिन टैंक-रोधी मिसाइल प्रणाली को अमेरिका से खरीदने जा रहा है। उन्होंने इसे अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों में बड़ी प्रगति बताया।

गोर ने एक्स पर लिखा, “बड़ी खबर! भारत ने युद्ध में परखी जा चुकी जैवलिन एंटी-टैंक प्रणाली खरीदने की योजना बनाई है। जैसा कि अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने मई 2026 में हुए शांगरी-ला संवाद में बताया था, यह अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों में एक बड़ा कदम है और सह-उत्पादन की संभावनाओं के द्वार खोलता है। हमारे दोनों देशों के बीच सहयोग रिकॉर्ड उच्च स्तर पर है।”

बयान में अमेरिकी रक्षा सचिव के मई 2026 के शांगरी-ला संवाद में दिए गए बयान का हवाला दिया गया है और लगभग साढ़े चार करोड़ डॉलर मूल्य की जैवलिन मिसाइलों की प्रारंभिक बिक्री के लिए साल 2025 में अमेरिका द्वारा दी गई मंजूरी के आधार पर संभावित सह-उत्पादन के अवसरों पर प्रकाश डाला गया है। यह घटनाक्रम गहरी रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है, जिससे भारत की कवच रोधी क्षमताओं में वृद्धि होती है और संयुक्त रक्षा विनिर्माण लक्ष्यों को आगे बढ़ाया जाता है।बयान में कहा गया है कि यह ऐतिहासिक हस्ताक्षर भारतीय सेना को जारी अमेरिकी समर्थन की गहराई को प्रदर्शित करते हुए अमेरिका-भारत प्रमुख रक्षा साझेदारी को और मजबूत करता है।

यह परस्पर लाभकारी सह-उत्पादन पर चर्चाओं और दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त अवसरों का मार्ग भी खोलता है।

उल्लेखनीय है कि भारत अमेरिकी विदेशी सैन्य बिक्री प्रक्रिया के माध्यम से जैवलिन मिसाइल खरीदने जा रहा है। इसमें 100 मिसाइल राउंड, प्रशिक्षण उपकरण और लॉन्च यूनिट शामिल हैं, जो प्रारंभिक रूप से 4.57 करोड़ डॉलर के पैकेज में शामिल हैं।

anand prakash

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page