मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता विधेयक को मिली राज्यपाल की मंजूरी

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता विधेयक को मिली राज्यपाल की मंजूरी
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भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम बढ़ाया है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने बुधवार को विधानसभा से पारित समान नागरिक संहिता विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है।अब विधि एवं विधायी विभाग इसे मुख्य सचिव के माध्यम से राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को भेजेगा। प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी संबंधित अधिकारियों से समन्वय करेंगे।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई को समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया था। विधेयक को मंजूरी के लिए राजभवन भेजा गया था। राज्यपाल ने इस पर लोकभवन की विधि और विधायी शाखा से विधिक अभिमत मांगा था। कानूनी राय मिलने तथा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की राज्यपाल से मुलाकात के बाद विधेयक को राज्य सरकार को वापस भेजा गया। चूंकि यूसीसी विधेयक में कई प्रावधानों का सीधा संबंध केंद्रीय कानूनों से है, इसलिए इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति अनिवार्य है।

केंद्रीय गृह विभाग भी इसके सांविधानिक और विधिक पहलुओं की समीक्षा करेगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही विधि एवं विधायी विभाग इसे राजपत्र में अधिसूचित करेगा और इसके प्रावधान प्रदेश में प्रभावी हो जाएंगे।संसदीय कार्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यूसीसी विधेयक में कई ऐसे प्रावधान हैं, जिनका संबंध केंद्रीय कानूनों से है। इसी वजह से इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजना जरूरी है। विधेयक केंद्र के पास पहुंचने के बाद केंद्रीय गृह विभाग से भी इस पर कानूनी अभिमत लिया जाएगा। यदि विधेयक संवैधानिक और कानूनी कसौटी पर उपयुक्त पाया जाता है, तो राष्ट्रपति की मंजूरी मिल सकती है।

कुप्रथाओं पर रोक और लिव-इन का नियमन

प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के अंतर्गत राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों को लेकर एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करने का प्रावधान है। विधेयक प्रभावी होते ही बहुविवाह और निकाह हलाला पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। साथ ही, तलाक के मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होगा। विधेयक में लिव-इन संबंधों को भी नियमों के दायरे में लाया गया है, जिसके तहत ऐसे संबंधों का पंजीयन कराना आवश्यक होगा। लिव-इन संबंधों से जन्म लेने वाली संतान को कानूनी अधिकार देने के साथ-साथ संपत्ति से जुड़े अधिकार भी प्रदान किए गए हैं।उत्तराखंड देश का पहला राज्य

उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी है। गुजरात विधानसभा भी अपना यूसीसी विधेयक पारित करके केंद्र की अनुमति के लिए भेज चुकी है और असम सहित कई अन्य राज्य भी इस दिशा में निरंतर कदम बढ़ा रहे हैं। मध्य प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से इस विधेयक को लेकर सुझाव देने वाले करीब 9.5 लाख लोगों के रिकॉर्ड को पूरी तरह सुरक्षित रखवा दिया है।

anand prakash

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