नेपाल में बाढ़ पीड़ितों के लिए भारत, चीन और विश्व बैंक की मदद की पेशकश, मोदी ने बालेन्द्र शाह से की बात

नेपाल में बाढ़ पीड़ितों के लिए भारत, चीन और विश्व बैंक की मदद की पेशकश, मोदी ने बालेन्द्र शाह से की बात
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काठमांडू। आपदाग्रस्त नेपाल में बाढ़ प्रभावित लोगों के उद्धार, राहत और पुनर्निर्माण के लिए भारत, चीन और विश्व बैंक ने तत्काल सहयोग की पेशकश की है।नेपाल की भोटेकोशी नदी में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ की चपेट में आने वाले 22 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।प्रभावितों की मौत का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हादसे के बाद से 105 भारतीयों समेत 400 से ज्यादा पर्यटक लापता हैं।

बाढ़ की खबर सामने आने के तुरंत बाद सुबह 10:35 बजे नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले से नेपाल मामलों को देखने वाले विश्व बैंक के राष्ट्रीय निदेशक डेविड सिस्लेन ने फोन पर संपर्क किया। वित्त मंत्री के सचिवालय के अनुसार, सिस्लेन ने विभिन्न स्रोतों से आपातकालीन सहायता के रूप में 2,500 करोड़ नेपाली रुपये (25 अरब रुपये) तक की सहायता उपलब्ध कराने की संभावना की जानकारी दी।

जबकि दक्षिणी पड़ोसी भारत ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए तत्काल आवश्यक राहत सामग्री की सूची नेपाल सरकार से मांगी है, ताकि आवश्यक सामान जल्द उपलब्ध कराया जा सके।भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बातचीत कर नेपाल में बाढ़ से हुई जनहानि पर शोक व्यक्त किया। मोदी ने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत के लोग नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़े हैं और भारत नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। उनके अनुसार, भारतीय टीमें बचाव और राहत अभियानों के लिए नेपाल के संबंधित पक्षों के साथ निकट समन्वय कर रही हैं।

भारत नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। हमारी टीमें बचाव और राहत प्रयासों के लिए निकटता से समन्वय कर रही हैं।

वहीं, उत्तरी पड़ोसी चीन ने भी तत्काल नकद सहायता देने की पेशकश की है। चीनी राजदूत झांग माओमिंग ने वित्त मंत्री के माध्यम से नेपाल सरकार से इसके लिए राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया है।पड़ोसी देशों और दातृ संस्थाओं की ओर से किए गए उदार सहयोग के आश्वासन के प्रति नेपाल सरकार की ओर से वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने आभार व्यक्त किया है। वित्त मंत्री के सचिवालय के अनुसार, सरकार अंतर-सरकारी समन्वय के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया और उसके तौर-तरीकों पर चर्चा कर रही है।

आज हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में रसुवा, नुवाकोट और धादिङ के प्रभावित स्थानीय निकायों को ‘विपद् संकटग्रस्त क्षेत्र’ घोषित किए जाने के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत एवं पुनर्निर्माण के लिए सहयोग जुटाने का रास्ता खुल गया है।

anand prakash

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