ड्रोन से टीबी जांच हुई आसान, 15 दिन की जगह 5 दिन में मिली रिपोर्ट
नई दिल्ली। भारत में अब ड्रोन के जरिए टीबी (क्षय रोग) के बलगम के नमूनों को लैब तक पहुंचाने से जांच में लगने वाला समय काफी कम होने के साथ ही मरीजों का खर्च भी लगभग खत्म हो गया है।भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ड्रोन पहल के तहत किए गए एक अध्ययन में पारंपरिक व्यवस्था और ड्रोन आधारित नमूना परिवहन प्रणाली की तुलना की गई है।
तेलंगाना के यादाद्री-भुवनगिरी जिले में एम्स बिबीनगर और राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के सहयोग से किए गए इस अध्ययन में 840 लोगों को शामिल किया गया। अध्ययन के अनुसार ड्रोन सेवा शुरू होने के बाद टीबी जांच की औसत (मीडियन) अवधि 15 दिन से घटकर 5 दिन रह गई और मरीजों का औसत जेब से होने वाला खर्च करीब 9,451 रुपये से घटकर केवल 91 रुपये रह गया। ड्रोन व्यवस्था के दौरान अधिकांश मरीजों को जांच के लिए यात्रा पर कोई खर्च नहीं करना पड़ा। परियोजना के तहत 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 60 उप-स्वास्थ्य केंद्र और 4 टीबी यूनिट को ड्रोन नेटवर्क से जोड़ा गया। इससे मरीज अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ही बलगम का नमूना जमा कर सके और ड्रोन उसे जांच प्रयोगशाला तक पहुंचाते रहे।
आईसीएमआर के महानिदेशक एवं स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने कहा कि समय पर और किफायती जांच टीबी उन्मूलन के लिए बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि यह अध्ययन दर्शाता है कि आधुनिक तकनीक के जरिए दूरदराज़ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकती हैं।अध्ययन में यह भी सामने आया कि ड्रोन के उपयोग से स्वास्थ्यकर्मियों का काम अधिक सुगम हुआ और समुदाय ने भी इस व्यवस्था को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया।
हालांकि, खराब मौसम, ड्रोन की सीमित भार क्षमता और कर्मचारियों के प्रशिक्षण जैसी चुनौतियों पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई।आईसीएमआर के अनुसार यह अध्ययन फिलहाल एक जिले के अनुभव पर आधारित है। विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में ऐसे और अध्ययन किए जाने के बाद भविष्य में ड्रोन आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

