रेलवे में संरचनात्मक सुधारों का ऐलान, ‘रेल भूमि’ पोर्टल से तेज होगी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया

रेलवे में संरचनात्मक सुधारों का ऐलान, ‘रेल भूमि’ पोर्टल से तेज होगी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया
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नई दिल्ली। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए मंगलवार को कई महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधारों की घोषणा करते हुए कहा कि रेलवे भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया के डिजिटलीकरण के लिए ‘रेल भूमि’ पोर्टल शुरू करेगा।यह वेब-आधारित प्लेटफॉर्म भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाएगा तथा विभिन्न रेलवे प्रणालियों को एकीकृत कर परियोजनाओं की निगरानी, मुआवजा वितरण और वैधानिक प्रक्रियाओं को ऑनलाइन संचालित करेगा।

वैष्णव ने रेल भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि रेलवे में व्यापक सुधारों का अभियान चलाया जा रहा है और इसी क्रम में वर्ष 2026 के दौरान 52 सुधार लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण, माल परिवहन, कौशल विकास, वैगन डिजाइन और कंटेनर नीति सहित कई क्षेत्रों में बड़े बदलाव किए गए हैं।

रेल मंत्री ने बताया कि फ्लाई ऐश का परिवहन अब खुले वैगनों के बजाय कंटेनरों में किया जाएगा। इससे परिवहन, भंडारण और अनलोडिंग के दौरान धूल से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण पर रोक लगेगी। उन्होंने बताया कि देश में प्रतिवर्ष लगभग 340 मिलियन मीट्रिक टन फ्लाई ऐश उत्पन्न होती है, जिसमें से 96 मिलियन मीट्रिक टन सीमेंट उद्योग में उपयोग होती है, जबकि रेलमार्ग से केवल 13 मिलियन मीट्रिक टन यानी लगभग चार प्रतिशत फ्लाई ऐश का परिवहन होता है। कंटेनर आधारित प्रणाली से प्रदूषण कम होगा तथा सामग्री का सुरक्षित भंडारण और आसान हैंडलिंग संभव होगी।

उन्होंने कहा कि रेलवे ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर (सीटीओ) नीति में भी व्यापक बदलाव किए हैं। अब पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क के लिए एकीकृत अखिल भारतीय लाइसेंस की व्यवस्था होगी। सभी मार्गों के लिए 25 करोड़ रुपये का समान पंजीकरण शुल्क लागू किया गया है तथा 20 वर्ष सफल संचालन के बाद लाइसेंस के नवीनीकरण पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। इससे कंटेनर परिवहन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और लॉजिस्टिक्स अधिक सरल एवं किफायती होंगे।रेल मंत्री ने बताया कि उर्वरकों के परिवहन में भी सुधार किए गए हैं। अब उर्वरकों को कंटेनरों में भी ले जाया जा सकेगा। मालभाड़ा संरचना को सरल बनाते हुए प्रति टन प्रति किलोमीटर के आधार पर नई व्यवस्था लागू की गई है। कंटेनर प्रणाली से उर्वरकों का सुरक्षित भंडारण, आसान वितरण और रैक की अनावश्यक रोकथाम से बचाव संभव होगा।

निर्माण क्षेत्र में सुधारों की जानकारी देते हुए वैष्णव ने कहा कि रेलवे परियोजनाओं में ठेकेदारों को कार्य प्रारंभ होने से पहले 10 प्रतिशत प्रदर्शन सुरक्षा जमा करनी होगी और बाद में चल रहे बिलों से कोई कटौती नहीं की जाएगी। जिन ठेकेदारों के लंबित मुकदमे उनकी शुद्ध संपत्ति के 50 प्रतिशत से अधिक होंगे, वे रेलवे निविदाओं में भाग नहीं ले सकेंगे। साथ ही कॉन्ट्रैक्टर ऑल रिस्क इंश्योरेंस और प्रोफेशनल इंडेम्निटी इंश्योरेंस को भी अनिवार्य बनाया गया है। उनका कहना था कि इन कदमों से गंभीर और सक्षम एजेंसियों की भागीदारी बढ़ेगी तथा परियोजनाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

रेल मंत्री ने रेलवे परियोजनाओं के लिए कौशल प्रमाणन नीति की भी घोषणा की। इसके तहत वेल्डर, प्लंबर, फिटर, राजमिस्त्री, कंक्रीट परीक्षक और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी कार्यों से जुड़े श्रमिकों का मानकीकृत मूल्यांकन किया जाएगा। क्यूआर-कोड आधारित स्किल कार्ड जारी किए जाएंगे और यह व्यवस्था अधिकतम 24 महीनों में सभी रेलवे परियोजनाओं में लागू कर दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि रेलवे ने वैगन डिजाइन नीति में भी बड़ा बदलाव किया है। अब उद्योग जगत स्वयं माल वैगनों के नए डिजाइन तैयार कर सकेगा। कोई भी डिजाइनर या निर्माता अपना प्रस्ताव आरडीएसओ को भेज सकेगा। मूल्यांकन, प्रोटोटाइप परीक्षण, फील्ड ट्रायल और सुरक्षा प्रमाणन के बाद नए डिजाइन के वैगनों को रेलवे नेटवर्क में शामिल किया जाएगा। इससे विभिन्न उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष प्रकार के वैगनों का विकास संभव होगा तथा नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।रेलवे ने पेट्रोलियम, तेल एवं स्नेहक (पीओएल) के परिवहन में भी सुधार किए हैं। नई नीति के तहत तेल कंपनियां स्वयं विशेष टैंक वैगन खरीद सकेंगी या लीज पर ले सकेंगी तथा अपनी जरूरतों के अनुसार नए डिजाइन के वैगनों का उपयोग कर सकेंगी।

इसके अलावा खाद्यान्न, आटा और दालों के परिवहन को भी कंटेनर आधारित बनाया गया है। रेलवे का कहना है कि इससे माल की गुणवत्ता बनी रहेगी, अशुद्धि की संभावना कम होगी और वितरण प्रणाली अधिक लचीली एवं कुशल बनेगी। साथ ही मालभाड़ा संरचना को भी सरल बनाते हुए प्रति टन प्रति किलोमीटर की दर लागू की गई है।

वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे का उद्देश्य केवल आधारभूत ढांचा विकसित करना नहीं बल्कि आधुनिक तकनीक, नवाचार, पारदर्शिता और दक्षता के माध्यम से भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप रेलवे प्रणाली का निर्माण करना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार रेलवे में सुधारों को गति देने के लिए प्रेरित करते रहे हैं और इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप यह व्यापक सुधार अभियान लागू किया जा रहा है।

anand prakash

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