ईरान-अमेरिका प्रत्यक्ष वार्ता करने पर राजी, खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद तय होगा स्थान

ईरान-अमेरिका प्रत्यक्ष वार्ता करने पर राजी, खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद तय होगा स्थान
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दोहा/तेहरान/वाशिंगटन। कतर की राजधानी दोहा में ईरान और अमेरिका को मध्यस्थों ने प्रत्यक्ष बातचीत के लिए तैयार कर लिया है। दोनों के बीच मध्यस्थता कर रहे कतर और पाकिस्तान के प्रयासों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सही दिशा में उठा कदम बताया है।ट्रंप ने ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर पत्रकारों से कहा कि बुधवार को इस मामले में अच्छी प्रगति हुई है। ईरान परमाणु निशस्त्रीकरण की दिशा में अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा है। कतर ने वार्ता की प्रगति पर खुशी जताई है और कहा कि अगली बैठक का स्थान पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद तय होगा।

सीबीएस न्यूज, कतर ट्रिब्यून और अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल अंसारी ने बुधवार को कहा कि समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग/एमओयू) से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है। उन्होंने एक्स पर कहा, कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने दोहा में अमेरिका और ईरान के वार्ताकारों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों में लेक ल्यूसर्न शिखर सम्मेलन के नतीजों को आगे बढ़ाते हुए इस्लामाबाद एमओयू से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि सभी पक्ष आने वाले समय में बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं। अगली बैठक ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली हुसैनी खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद जल्द से जल्द तय की जाएगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ अप्रत्यक्ष बातचीत के नए दौर के बीच दोहा में रहे। उन्होंने कतर के प्रधानमंत्री से मुलाकात की, लेकिन तकनीकी बातचीत में शामिल नहीं हुए। उधर, अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने दोहा बातचीत पर चर्चा की, लेकिन पूरी तरह से युद्ध की स्थिति में वापस न लौटने का कोई वादा नहीं किया। वेंस ने कहा कि दोहा में बातचीत अच्छी चल रही है, लेकिन उन्होंने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा कि यह ईरान के हाथ में है।अमेरिका के वर्जीनिया में नेवल एयर स्टेशन ओशियाना में मरीन सैनिकों से मिलने के बाद वेंस ने पत्रकारों से कहा, मैं कोई वादा नहीं कर सकता, क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि ईरान के नेतृत्व अंततः क्या करने जा रहा हैं। मैं बस इतना वादा कर सकता हूं कि राष्ट्रपति सेना को तब तक वापस नहीं भेजेंगे जब तक कि ऐसा करना जरूरी न हो, या जब तक इसके लिए कोई स्पष्ट उद्देश्य न हो। उन्होंने कहा अगर ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम फिर शुरू करने की कोशिश करता है या कमर्शियल जहाजों पर फिर से गोलीबारी शुरू करता है तो सोच बदल जाएगी। अभी राष्ट्रपति ने यही कहा है कि जाओ और समझौता करो। ईमानदारी से बातचीत करो।

इस पूरे घटनाक्रम पर कतर ने सकारात्मक प्रगति की बात कही है। कतर ने कहा कि अमेरिका और ईरान ने 17 जून को हुए एमओयू से जुड़े मुद्दों पर दोहा में अपनी अप्रत्यक्ष तकनीकी बातचीत पूरी कर ली है। तेहरान का कहना है कि समझौते के उल्लंघन की जानकारी देने और उस पर चर्चा करने के लिए वाशिंगटन के साथ कम्युनिकेशन चैनल बनाया जाएगा। तेहरान ने जानकारी दी है कि शिपिंग रूट के बाहर कम गहरे पानी में जाने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में एक विदेशी कंटेनर (जहाज) फंस गया है।

इस बीच ईरान के उप विदेशमंत्री काजेम गरीबाबादी ने बहरीन में हुई अमेरिका की अगुवाई वाली क्षेत्रीय सुरक्षा बातचीत को खारिज कर दिया है। इस बातचीत में 12 देशों के प्रतिनिधियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि होर्मुज ईरान के नियंत्रण में है। बहरीन में होने वाली सैन्य बैठक फारस की खाड़ी में कानूनी व्यवस्था और सुरक्षा कायम नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि दोहा में ईरानी प्रतिनिधिमंडल की बैठकें केवल कतर और पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडलों के साथ हुई हैं। उनकी यह टिप्पणी तब आई, जब अमेरिका ने घोषणा की कि 12 देशों सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, लेबनान और सीरिया के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने बहरीन में मुलाकात की और होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापार के निर्बाध प्रवाह के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।कतर मंत्रिपरिषद ने बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से लंबित मुद्दों का स्थायी समाधान खोजने के मकसद से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के लिए अपना समर्थन फिर से दोहराया है। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिपरिषद की साप्ताहिक बैठक में कतर ने बहरीन और कुवैत पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा भी की। इन हमलों को दोनों देशों की संप्रभुता का खुला उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों का घोर उल्लंघन माना।

anand prakash

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