छत्तीसगढ़ पावर प्लांट हादसे में अब तक 17 मजदूरों की मौत,मृतको में दो बिहार के मजदूर

छत्तीसगढ़ पावर प्लांट हादसे में अब तक 17 मजदूरों की मौत,मृतको में दो बिहार के मजदूर
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सक्ती,15 अप्रैल (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। जिले के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने यह जानकारी दी।पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मंगलवार को हुए इस भीषण हादसे में कुल 36 श्रमिक झुलस गए थे। इनमें से 17 श्रमिकों की मौत हो चुकी है तथा 19 घायल हैं, जिनका उपचार चल रहा है।

कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार घायलों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान कर उनके परिजनों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है। पोस्टमार्टम के बाद पार्थिव शरीर को उनके गृहग्राम तक एम्बुलेंस के माध्यम से भेजने और तात्कालिक सहायता राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

कलेक्टर ने बताया कि घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं तथा जांच टीम जल्द ही घटनास्थल का निरीक्षण करेगी।

सहायता राशि की घोषणा

वेदांता प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपये की सहायता राशि और एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की है। साथ ही घायलों को 15-15 लाख रुपये देने की बात कही है। वेदांता ग्रुप ने कहा कि दुख की इस घड़ी में हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं उन सभी के साथ हैं जो इससे प्रभावित हुए हैं। हम इन परिवारों को अपना अटूट समर्थन देना जारी रखेंगे।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी राहत राशि की घोषणा की गई थी। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) के तहत मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है।मुख्यमंत्री साय ने बिलासपुर संभाग के कमिश्नर को इस घटना की जांच करने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पूरे मामले पर सतत निगरानी रखे हुए है और प्रभावित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ खड़ी है।

मृतकों के नाम

हादसे में जान गंवाने वाले लोगों में छत्तीसगढ़ के 5, बिहार के 2, झारखंड के 3, पश्चिम बंगाल के 5 तथा उत्तर प्रदेश के 2 मजदूर शामिल हैं। इनकी पहचान रितेश कुमार (सोनबर्शा, भागलपुर, बिहार), अमृत लाल पटेल (मंझापारा, डभरा, सक्ती, छत्तीसगढ़), थंडा राम लहरे (मालखरौदा, सक्ती, छत्तीसगढ़), तरुण कुमार ओझा (सिंदरी, धनबाद, झारखंड), आकिब खान (दरभंगा, बिहार), सुसांत जना (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल), अब्दुल करीम (झारखंड), उधव सिंह यादव (रायगढ़, छत्तीसगढ़), शेख सैफुद्दीन (हल्दिया, पश्चिम बंगाल), पप्पू कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश), अशोक परहिया (पलामू, झारखंड), मनस गिरी (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल), बृजेश कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश), रामेश्वर महिलांगे (जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़), कार्तिक महतो (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल), नदीम अंसारी (सक्ती, छत्तीसगढ़), शिबनाथ मुर्मू (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल) के रूप में हुई है।

anand prakash

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