वास्तविक विकास के लिए महिलाओं की समान भागीदारी जरूरी : राष्ट्रपति

वास्तविक विकास के लिए महिलाओं की समान भागीदारी जरूरी : राष्ट्रपति
Facebook WhatsApp

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि सही अर्थों में विकास हासिल करने के लिए देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए महिलाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ उन्हें हर कदम पर समर्थन देना भी जरूरी है।

राष्ट्रपति रविवार को यहां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों और योगदान का सम्मान करना तथा लैंगिक समानता, सुरक्षा, सम्मान और महिला सशक्तीकरण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराना था।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज महिलाएं शिक्षा, प्रशासन, न्यायपालिका, सेना, चिकित्सा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला और उद्यमिता जैसे अनेक क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और पंचायतों में ग्रामीण विकास का नेतृत्व भी कर रही हैं। कई महिलाएं उद्योग, स्टार्टअप और कॉरपोरेट जगत में भी अपनी क्षमता और योग्यता से नेतृत्व प्रदान कर रही हैं। खेल जगत में भी बेटियां उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण यह विश्वास पैदा करते हैं कि अवसर और समर्थन मिलने पर महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर सकती हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत तेजी से ‘वूमन-लेड डेवलपमेंट’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पिछले एक दशक में महिलाओं के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए मजबूत आधार तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि देश में स्कूली शिक्षा में लैंगिक समानता हासिल कर ली गई है और उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात के आधार पर छात्राओं की संख्या अधिक है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) शिक्षा में भी महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में प्रत्येक जिले में महिला छात्रावास स्थापित करने का प्रावधान किया गया है, जिससे एसटीईएम क्षेत्र की छात्राओं को अपनी पढ़ाई जारी रखने में सहायता मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की बेटियां ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार हो रही हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाएं रोजगार देने वाली उद्यमी के रूप में भी उभर रही हैं। स्टार्ट-अप इंडिया योजना के तहत सहायता प्राप्त करने वाले आधे से अधिक स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक है। उन्होंने बताया कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पर वर्तमान में दो लाख से अधिक महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम सक्रिय हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में शुरू की गई ‘शी-मार्ट’ पहल के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक जिले में समुदाय द्वारा संचालित खुदरा आउटलेट स्थापित किए जाएंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले वर्ष लागू किए गए श्रम संहिताओं का उद्देश्य महिला श्रमिकों के लिए अधिक समावेशी, सुरक्षित और सशक्त कार्य वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा महिलाओं के सशक्तीकरण को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान बेटियों के जन्म, शिक्षा और सुरक्षा को बढ़ावा दे रहा है, जबकि ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सुरक्षित बचत का अवसर प्रदान कर रही है। ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ रसोईघरों को धुएं से मुक्त बनाकर महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा कर रही है और ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद कर रही है। इसके अलावा ‘मिशन शक्ति’ के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण को मजबूत किया जा रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए अनेक प्रयास किए जाने के बावजूद उनके विकास के मार्ग में अभी भी कई बाधाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि आज भी कई महिलाओं को भेदभाव, समान कार्य के लिए असमान वेतन और घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं का समाधान केवल कानून के माध्यम से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज की सोच में बदलाव भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में बेटा और बेटी के बीच भेदभाव समाप्त नहीं होगा, तब तक वास्तविक समानता स्थापित नहीं हो सकेगी। उन्होंने कहा कि भय और भेदभाव से मुक्त वातावरण में महिलाएं राष्ट्र निर्माण में अपना सर्वोत्तम योगदान दे सकती हैं।

राष्ट्रपति ने इस अवसर पर सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे प्रत्येक बेटी को शिक्षा और समान अवसर प्रदान करने, महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा समाज में व्याप्त हर प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि ऐसा करके भारत विश्व के सामने महिला सशक्तीकरण का आदर्श प्रस्तुत कर सकता है। राष्ट्रपति ने देशवासियों को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान करने के साथ-साथ उनके सशक्तीकरण के लिए नए संकल्प लेने का अवसर भी है।

anand prakash

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोरी करने से बेहतर है खुद की कंटेंट बनाओ! You cannot copy content of this page