भारत-कनाडा के बीच 8 करार,9 घोषणाएं, व्यापार समझौते से जुड़े विषयों पर सहमति

भारत-कनाडा के बीच 8 करार,9 घोषणाएं, व्यापार समझौते से जुड़े विषयों पर सहमति
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नई दिल्ली। भारत और कनाडा के बीच सोमवार को हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने आपसी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। वार्ता के उपरांत कुल आठ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए तथा नौ प्रमुख घोषणाएं की गईं, जिनका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देना है।वार्ता में भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते के लिए विचारणीय विषय (टर्म ऑफ रेफरेंस) तय हुए। तकनीकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत-कनाडा-ऑस्ट्रेलिया त्रिपक्षीय समझौता हुआ। भारत को यूरेनियम की आपूर्ति के लिए वाणिज्यिक अनुबंध किया गया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच सोमवार को दिल्ली के हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता हुई। वार्ता के बाद दोनों नेताओं की उपस्थिति में रक्षा, शिक्षा, कृषि एवं नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर हुए समझौतों का आदान-प्रदान किया गया। दोनों नेताओं ने इसके बाद संयुक्त प्रेस वक्तव्य दिया। इसमें प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के सहयोग को गति देने के लिए कार्नी की प्रशंसा की तो वहीं कार्नी ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की। उन्होंने स्वामी विवेकानंद को उद्धृत किया और उनके प्रसिद्ध वाक्य की तर्ज पर कहा, “हम आगे बढ़ेंगे, हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक विकसित भारत 2047 और कनाडा स्ट्रॉन्ग के लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते।”

विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत-कनाडा के बीच रक्षा डायलॉग और संसदीय मैत्री समूह की स्थापना की जाएगी और भारत-कनाडा सीईओ फोरम का पुनर्गठन होगा। कनाडा ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस और इंटरनेशनल सोलर अलायंस में शामिल होगा। साथ ही भारत के सहयोग से कनाडा इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन में डायलॉग पार्टनर के तौर पर भी शामिल होगा।

मंत्रालय के अनुसार भारत में संयुक्त दाल प्रोटीन उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। वहीं कनाडा आगामी 17-30 मार्च तक होने वाले भारत जनजातीय उत्सव-2026 में भागीदारी करेगा।

विश्वविद्यालय कनाडा एक नई कनाडा-भारत संयुक्त योग्यता एवं नवाचार रणनीति लांच करेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर और इनोवेशन जैसे क्षेत्र में यूनिवर्सिटी/इंस्टीट्यूशन के बीच 24 साझेदारी समझौते होना तय किया गया है। इसके अलावा ग्लोबलिंक रिसर्च इंटर्नशिप, महत्वपूर्ण खनिज सहयोग, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए।

विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) पी. कुमारन ने कहा कि इस दौरे के पांच ठोस नतीजे मिले। पहला, सीईपीए के लॉन्च के ज़रिए एक टिकाऊ आर्थिक सहारा देने पर सहमति बनी। सीईपीए के लिए शर्तों पर साइन करने से 2026 के आखिर तक एक बड़ा, संतुलित और दोनों के लिए फायदेमंद समझौता करने का एक साफ रोडमैप मिलता है।

कुमारन ने बताया कि नरेन्द्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री के बीच इज़राइल-ईरान संकट पर चर्चा हुई। भारत ने ईरान और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर गहरी चिंता जताई तथा सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव न बढ़ाने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। संवाद और कूटनीति से समाधान पर जोर दिया गया।

अपराध के मुद्दे पर कुमारन ने कहा कि भारत और कनाडा के बीच सुरक्षा सहयोग मजबूत हो रहा है। दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठकें दिल्ली और ओटावा में हुईं। आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह सक्रिय है। प्रत्यर्पण व कानूनी सहयोग पर चर्चा जारी है। नशीले पदार्थों और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने के लिए समन्वय बढ़ाने पर सहमति बनी।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने वक्तव्य में मेहमान नेता की दोनों देशों के संबंधों को गति देने के लिए सराहना की। उन्होंने कहा कि जल्द होने जा रहा व्यापार समझौता दोनों देशों में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि अति आवश्यक खनिजों को लेकर हुए समझौते से सप्लाई मजबूत होगी। अंतरिक्ष क्षेत्र में दोनों के स्टार्टअप और बिजनेस आपस में जुड़ेंगे।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान आतंकवाद और चरमपंथ को मानवता की साझा चुनौती बताया और कहा कि इसके खिलाफ दोनों देशों का सहयोग वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है।

पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने संवाद और कुटनीति से माध्यम से सभी विवादों के समाधान का समर्थन किया। साथ ही बताया कि मौजूदा परिस्थियों में भारत अपने सभी नागरिकों की सुरक्षा के लिए सभी देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा।

वहीं कनाडा के प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि पिछले एक वर्ष में दोनों देशों की सरकारों के बीच सहयोग में विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा, “यह महज़ एक रिश्ते का नवीनीकरण नहीं है, बल्कि एक मूल्यवान साझेदारी का विस्तार है जिसमें नई महत्वाकांक्षा, लक्ष्य और दूरदर्शिता झलकती है। यह दो आत्मविश्वासी देशों की साझेदारी है जो भविष्य के लिए अपना मार्ग स्वयं तय कर रहे हैं।”

कनाडा के प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में पिछले दशक में भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और एक बड़ी ताकत बन गया है। इस संदर्भ में कनाडा उनकी महत्वाकांक्षा और उद्देश्य की भावना को साझा करता है।

कार्नी ने कहा कि दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अपना सहयोग और मजबूत कर रहे हैं। पवन, सौर और हाइड्रोजन ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार कर रहे हैं। हमारी योजना 2050 तक अपने ग्रिड को दोगुना करने की है और भारत इस विस्तार में एक प्रमुख भागीदार हो सकता है।

anand prakash

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