गणतंत्र दिवस समारोह में आज कर्तव्य पथ पर दिखेगा सांस्कृतिक विविधता,देश की प्रगति और सैन्य शक्ति का अनोखा संगम

गणतंत्र दिवस समारोह में आज कर्तव्य पथ पर दिखेगा सांस्कृतिक विविधता,देश की प्रगति और सैन्य शक्ति का अनोखा संगम
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नई दिल्ली। कृतज्ञ राष्ट्र आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु नई दिल्ली में कर्तव्य पथ से समारोह का नेतृत्व करेंगी। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन समारोह के मुख्य अतिथि होंगे।इस वर्ष राष्ट्रपति भवन से लेकर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक तक फैले कर्तव्य पथ को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष, भारत की अभूतपूर्व प्रगति, मजबूत सैन्य शक्ति, समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी के अविस्मरणीय संगम को प्रस्तुत करने के लिए सजाया गया है।

समारोह सुबह 10ः30 बजे शुरू होगा और लगभग 90 मिनट तक चलेगा। इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के दौरे से होगी। प्रधानमंत्री युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर प्राणोत्सर्ग करने वाले राष्ट्र नायकों को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद, प्रधानमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्ति परेड देखने के लिए कर्तव्य पथ पर सलामी मंच की ओर जाएंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष का आगमन होगा। राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रगान होगा और 105 एमएम लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। ‘विविधता में एकता’ थीम पर 100 सांस्कृतिक कलाकार परेड की शुरुआत करेंगे। 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार एमआई-17 1वी हेलीकॉप्टर ध्वज फॉर्मेशन में फूलों की पंखुड़ियों की बारिश करेंगे। राष्ट्रीय ध्वज को लेकर, हेलीकॉप्टरों के इस प्रदर्श का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन आलोक अहलावत करेंगे।

इसके बाद राष्ट्रपति के सलामी लेने के साथ परेड शुरू होगी। दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग परेड कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार परेड की कमान संभालेंगे। वो दूसरी पीढ़ी के अधिकारी हैं। मुख्यालय दिल्ली क्षेत्र के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल नवराज ढिल्लों परेड के सेकंड-इन-कमांड होंगे। वो तीसरी पीढ़ी के सैन्य अधिकारी हैं।

इसके बाद सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों के गर्वित विजेता आएंगे। इनमें परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (रिटायर्ड) और सूबेदार मेजर संजय कुमार और अशोक चक्र विजेता मेजर जनरल सीए पिथावालिया (रिटायर्ड) और कर्नल डी श्रीराम कुमार शामिल हैं। परमवीर चक्र दुश्मन के सामने रक्षा बलों के सदस्यों की सबसे अधिक असाधारण बहादुरी, वीरता और आत्म-बलिदान के कार्य के लिए दिया जाता है, जबकि अशोक चक्र अन्य स्थितियों में किए गए इसी तरह के वीरता, साहस और आत्म-बलिदान के कार्यों के लिए दिया जाता है।

यूरोपियन यूनियन (ईयू) दल में तीन जिप्सी पर चार ध्वजवाहक होंगे। वे चार ध्वज ले जाते हुए दिखेंगे। इनमें ईयू का ध्वज होगा, जो यूरोपियन यूनियन का सबसे पहचाना जाने वाला प्रतीक है, इनमें यूरोपियन यूनियन मिलिट्री स्टाफ का ध्वज, ईयू नेवल फोर्स अटलांटा का झंडा और ईयू नेवल फोर्स एस्पाइड्स का झंडा शामिल होगा।

पहली बार परेड में भारतीय सेना का चरणबद्ध बैटल एरे फॉर्मेट दिखाया जाएगा, जिसमें हवाई घटक भी शामिल होगा। रेकी एलिमेंट में 61 कैवलरी एक्टिव कॉम्बैट यूनिफॉर्म में होगी। इसके बाद हाई मोबिलिटी रिकोनिसेंस व्हीकल होगा, जो भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया आर्मर्ड लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल है। हवाई सहायता स्वदेशी ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और इसका आर्म्ड वर्जन रुद्र प्रहार फॉर्मशन देगा, जो युद्धक्षेत्र में निर्णायक पहल का प्रदर्शन करेगा। कॉम्बैट सपोर्ट एलिमेंट में भारत की नई पीढ़ी के मानवरहित वॉरहेड हथियार शामिल होंगे। उन्हें शक्तिबाण और दिव्यास्त्र के ज़रिए दिखाया जाएगा।

इसके बाद धनुष गन सिस्टम और अमोघ एडवांस्ड टोएड आर्टिलरी गन सिस्टम आएंगे।यह आत्मनिर्भर भारत की भावना और रक्षा निर्माण में तकनीकी आत्मनिर्भरता को दिखाएंगे। लॉन्ग-रेंज सटीकता और जबरदस्त मारक क्षमता का शक्तिशाली संयोग सुपरसोनिक ब्रह्मोस वेपन सिस्टम के साथ-साथ स्वदेशी सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के जरिए दिखाया जाएगा।

इसके बाद रक्षा बलों के हिम योद्धा आएंगे। इनमें एनिमल कंटिंजेंट शामिल है। इसमें बहादुर सैनिकों के साथ बैक्ट्रियन ऊंट, जांस्कर टट्टू, ब्लैक काइट्स (शिकारी पक्षी) और भारतीय नस्ल के कुत्ते (मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पीपराई, कोम्बई और राजापलायम) शामिल हैं।

कर्तव्य पथ पर मार्च करते हुए मिक्स्ड स्काउट्स कंटिंजेंट, राजपूत रेजिमेंट, असम रेजिमेंट, जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री, रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी, 4 भैरव बटालियन – सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट, और संयुक्त सैन्य बैंड भी दिखाई देंगे। नौसेना के दल में 144 युवा कर्मी शामिल होंगे। इसका नेतृत्व लेफ्टिनेंट करण नाग्याल दल कमांडर के रूप में करेंगे। वायु सेना दल में चार अधिकारी (एक दल कमांडर और तीन अतिरिक्त अधिकारी) और 144 वायु सैनिक शामिल हैं। दल कमांडर स्क्वाड्रन लीडर जगदीश कुमार होंगे। इसके अलावा तीनों सेनाओं के पूर्व सैनिकों की झांकी युद्ध से लेकर राष्ट्र-निर्माण तक पूर्व सैनिकों की यात्रा को दिखाएगी। इसकी थीम ‘संग्राम से राष्ट्रनिर्माण तक’ है। इसके अलावा तीनों सेनाओं की झांकी ‘ऑपरेशन सिंदूर: संयुक्तता के माध्यम से विजय’ को दर्शाएगी।

भारतीय तटरक्षक (आईसीजी) के पूरी तरह से महिला दल का नेतृत्व असिस्टेंट कमांडेंट निशी शर्मा करेंगी। अपने आदर्श वाक्य ‘वयं रक्षामः – हम रक्षा करते हैं’ से निर्देशित, यह दल भारत की समुद्री शक्ति और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाएगा। डीआरडीओ परेड के दौरान लॉन्चर के साथ एलआर-एएसएचएम का प्रदर्शन करेगा। कर्तव्य पथ पर मार्च करने वाली टुकड़ियों में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की टुकड़ी होगी। इसका नेतृत्व सब इंस्पेक्टर करण सिंह करेंगे। सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फोर्स की टुकड़ी का नेतृत्व असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला और असिस्टेंट कमांडेंट सुरभि रवि करेंगे। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की टुकड़ी का नेतृत्व बैंड मास्टर एएसआई देवेंद्र सिंह करेंगे और दिल्ली पुलिस की टुकड़ी का नेतृत्व असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस अनंत धनराज सिंह करेंगे। सीमा सुरक्षा बल की ऊंट टुकड़ी की कमान डिप्टी कमांडेंट महेंद्र पाल सिंह राठौर संभालेंगे।

एसडब्ल्यू (लड़कियों) दल की कमांडर सीनियर अंडर ऑफिसर मानसी विश्वकर्मा हैं। वो उत्तराखंड डायरेक्टोरेट से हैं। वे सभी डायरेक्टोरेट से चुनी गई 148 गर्ल कैडेट्स के एनसीसी गर्ल्स दल का नेतृत्व करेंगी। एसडब्ल्यू (लड़कों) दल के कमांडर सीनियर अंडर ऑफिसर तौहीद अल्ताफ हैं। वे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख डायरेक्टोरेट से हैं। वे 148 बॉय कैडेट्स के दल का नेतृत्व करेंगे। माय भारत नेशनल सर्विस स्कीम के 200 वॉलंटियर्स के मार्चिंग दल का नेतृत्व जयपुर, राजस्थान की सुश्री चारू सिंह करेंगी।

परेड में कुल 30 झांकी होंगी। इनमें 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की और 13 मंत्रालयों/विभागों/सेवाओं की – ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम’ और ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ की व्यापक थीम पर आधारित होंगी। ये झांकियां राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष और विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती आत्मनिर्भरता के दम पर देश की तेज प्रगति का अनोखा संगम दिखाएंगी।

anand prakash

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