नेपाल पुलिस ने कहा- पत्रकारों को साइबर ब्यूरो में बुलाना गलत नहीं

नेपाल पुलिस ने कहा- पत्रकारों को साइबर ब्यूरो में बुलाना गलत नहीं
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काठमांडू। नेपाल में पत्रकारों को हिरासत में लेने और न्यूजरूम में पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस बीच नेपाल पुलिस ने दावा किया है कि कुछ पत्रकारों को समाचारों की सत्यता के बारे में सामान्य जानकारी लेने के लिए साइबर ब्यूरो के कार्यालय में बुलाने में कुछ भी गलत नहीं था।पुलिस ने आधी रात को बयान जारी कर अपनी कार्रवाई को उचित और सही मंशा से की गई कार्रवाई बताया है।

शुक्रवार देर रात सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों ने विभिन्न मीडिया संस्थानों के न्यूज़रूम में प्रवेश कर कुछ पत्रकारों को हिरासत में लिया था। हालांकि, व्यापक विरोध के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इसके बाद नेपाल पुलिस ने रात करीब 1:40 बजे व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से अपना आधिकारिक बयान जारी किया।

नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अविनारायण काफ्ले ने बयान में कहा कि हाल के दिनों में नेपाल पुलिस के खिलाफ सोशल मीडिया और विभिन्न संचार माध्यमों में भ्रामक समाचार एवं संदेश लगातार प्रसारित किए जा रहे हैं। इससे पुलिस की व्यावसायिक छवि, आम जनता के विश्वास और सरकार तथा पुलिस संगठन के बीच संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई थी।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी चिंता व्यक्त की गई थी। इसी के मद्देनजर साइबर ब्यूरो ने कुछ पत्रकारों को समाचारों की सत्यता, तथ्यपरकता और कानूनी आधार के बारे में सामान्य जानकारी प्राप्त करने के लिए कार्यालय बुलाया थापुलिस प्रवक्ता ने इस कार्रवाई को पुलिस के नियमित कार्य निष्पादन का हिस्सा बताते हुए कहा कि यह सही मंशा से किया गया कदम था।

गाैरतलब है कि, शुक्रवार शाम सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों ने नेपाल प्रेस डॉट कॉम के पत्रकार बिश्वमणि सुबेदी, डीएनए खबर के पत्रकार धीरज बस्नेत और मोटिवेट न्यूज के पत्रकार शोभराज बराल को उनके मीडिया संस्थानों के न्यूज़रूम से हिरासत में लिया था। इसी तरह पत्रकार नवराज मैनाली को हिरासत में लेने के लिए पुलिसकर्मी नया पत्रिका के कार्यालय भी पहुंचे थे। हालांकि, मैनाली के वहां नहीं मिलने पर पुलिसकर्मियों ने नया पत्रिका के संपादक खगेन्द्र पंत के साथ करीब ढाई घंटे तक बहस की।

पत्रकारों को हिरासत में लेने की घटना के बाद व्यापक विरोध शुरू हो गया। इसके बाद प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के सचिवालय ने स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई में प्रधानमंत्री, उनके सचिवालय या प्रधानमंत्री कार्यालय की कोई संलिप्तता नहीं थी।

प्रधानमंत्री की प्रेस सलाहकार दीपा दाहाल ने शुक्रवार शाम फेसबुक पर बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री को पत्रकारों की गिरफ्तारी के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही प्रधानमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को हिरासत में लिए गए पत्रकारों को तत्काल रिहा करने और न्यूज़रूम में प्रवेश कर किसी भी प्रकार की धरपकड़ नहीं करने का स्पष्ट निर्देश दिया था।

नेपाल पुलिस ने भी अपने बयान में कहा कि वह प्रेस को राज्य का चौथा स्तंभ मानती है और पत्रकारों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है। पुलिस ने प्रेस की स्वतंत्रता और संचारकर्मियों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।

anand prakash

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