जितना और शिकारगंज में शराब सहित कारोबारी गिरफ्तार
मोतिहारी। जितना थाना अन्तर्गत गुप्त सूचना पर एक व्यक्ति आलोक कुमार पिता राम विश्वास प्रसाद यादव , ग्राम – बनकटवा , थाना जितना को एक मोटरसाइकिल के साथ 90 बोतल नेपाली कस्तूरी शराब के साथ पकड़ा गया। प्रत्येक बोतल 300 एमएल , कुल मात्रा 27 लीटर बताया गया है। के साथ पकड़ा गया।
वही शिकारगंज थानाध्यक्ष गोपाल कुमार द्वारा थाना अंतर्गत ग्राम परेवा ढांगड टोली चौक पर एक स्प्लेंडर मोटर साइकिल पर 90 लीटर देशी शराब लदे मोटर साइकिल के साथ दो अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया। जिसमें लवकुश दास , सुभाष दास, दोनों ग्राम परतापुर , थाना चिरैया को 90 लीटर चुलाई शराब एवं शराब लदे मोटर साइकिल के साथ गिरफ्तार किया गया। पुलिस थाना क्षेत्र में शराब के विरुद्ध लगातार अभियान जारी रखी है।
कड़ी सुरक्षा के बीच भयमुक्त वातावरण में सारण शिक्षक निर्वाचन शांतिपूर्ण संपन्न
-1743 मतदाताओं में 1562 मतदाताओं ने मतदान में लिया हिस्सा
जिलेभर में 89.61 प्रतिशत हुआ मतदान
मोतिहारी। बिहार विधान परिषद के 03, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के कड़ी सुरक्षा के बीच शुक्रवार को पूरे जिले में स्वच्छ, निष्पक्ष और भयमुक्त वातावरण में शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न हो गया। पूर्वी चंपारण में मतदान को लेकर सभी 27 प्रखंड परिसर में मतदान केंद्र बनाए गए थे। जहां कुल 1743 मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करना था, जिसमें से 1562 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस प्रकार जिला में मतदान का प्रतिशत 89.61 प्रतिशत रहा है। आज के मतदान में कुल 1394 पुरुष मतदाता एवं 168 महिलाक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
जिले के चार प्रखंड घोड़ासहन, पताही, तेतरिया और रामगढ़वा में शत प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने को लेकर निर्वाचन आयोग के निर्देश के आलोक में जिला प्रशासन के द्वारा मुकम्मल प्रशासनिक व्यवस्था की गई थी। सभी मतदान केंद्र पर स्टेटिक फोर्स के साथ-साथ दंडाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई थी इसके अतिरिक्त जोनल अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की थी। जिनके जिम्मे लगभग दो प्रखंड आवंटित किए गए थे। उसके ऊपर जिला के 07 वरीय अधिकारियों-नगर आयुक्त, अपर समाहर्ता, उप विकास आयुक्त, एडीएम लोक शिकायत,एडीएम विभागीय जांच और जिला बंदोबस्त पदाधिकारी को सुपर जोनल दडाधिकारी बनाए गए थे।
इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी सौरव सुमन यादव एवं पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात लगातार मतदान केंद्रो का भ्रमण कर मतदान प्रक्रिया का जायजा लेते दिखे। जिला स्तर पर जिला नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई थी, जहां से संपूर्ण जिले में चल रहे मतदान की गतिविधियों की पल-पल की रिपोर्ट ली जा रही थी।
विधान परिषद के लिए मतदान की प्रक्रिया जिले में पूरी तरह से शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना प्राप्त नहीं है। उप विकास आयुक्त डॉ प्रदीप कुमार के द्वारा सुपर जोनल दंडाधिकारी के रूप में सिकरहना अनुमंडल अंतर्गत ढाका, चिरैया,घोड़ासहन और बनकटवा प्रखंड में चल रहे मतदान केन्द्रो का जायजा लिया।
देर रात रक्सौल थाना पहुंचे एसपी स्वर्ण प्रभात, पुलिसिया व्यवस्था की गहन समीक्षा
-संतरी कक्ष, अनुसंधान कक्ष और मेस का किया निरीक्षण, पुलिसकर्मियों के लिए बने भोजन का भी चखा स्वाद, शिकायत मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी।
रक्सौल। जिले में पुलिस व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने, थाना की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने और पुलिस पदाधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने को लेकर जिला पुलिस कप्तान स्वर्ण प्रभात ने गुरुवार की देर रात रक्सौल थाना का निरीक्षण किया। देर रात एसपी के थाना पहुंचने पर पुलिस पदाधिकारी और कर्मी सक्रिय नजर आए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने थाना परिसर में संचालित विभिन्न कार्यों, सुरक्षा व्यवस्था, अनुसंधान से संबंधित गतिविधियों तथा पुलिसकर्मियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लिया।
इस दौरान एसपी ने संबंधित पदाधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करते हुए उन्हें अपने कर्तव्यों के प्रति सजग और जिम्मेदार रहने का निर्देश दिया। निरीक्षण के क्रम में एसपी स्वर्ण प्रभात ने सबसे पहले संतरी कक्ष की व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने थाना की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारियों के निर्वहन पर ध्यान दिया।
उन्होंने पुलिसकर्मियों को सतर्कता के साथ अपनी ड्यूटी निभाने और थाना परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर रहने का संदेश दिया। इसके बाद उन्होंने अनुसंधान कक्ष का निरीक्षण किया, जहां पुलिस पदाधिकारियों के कार्यों और अनुसंधान संबंधी व्यवस्था की जानकारी ली। थाना में आने वाले मामलों के अनुसंधान और पुलिस की कार्यशैली को लेकर उन्होंने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
–मेस में पहुंचकर भोजन की गुणवत्ता परखी
थाना निरीक्षण के दौरान एसपी ने पुलिसकर्मियों के लिए संचालित मेस का भी जायजा लिया। उन्होंने मेस में भोजन तैयार करने और वहां की व्यवस्था को देखा। इस दौरान उन्होंने पुलिसकर्मियों के लिए बनाए गए खाने का स्वाद भी चखा। उनके इस निरीक्षण का उद्देश्य थाना परिसर में उपलब्ध सुविधाओं और पुलिसकर्मियों के लिए संचालित व्यवस्था की स्थिति को करीब से देखना रहा। उन्होंने मेस की व्यवस्था का जायजा लेते हुए संबंधित कर्मियों से भी जानकारी ली।
–शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान जिला पुलिस कप्तान ने उपस्थित पुलिस पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि अपने कर्तव्यों के निर्वहन में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस व्यवस्था में अनुशासन, जवाबदेही और आम लोगों के प्रति संवेदनशीलता बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता की शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
एसपी ने पुलिस पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी तत्परता से करें तथा थाना की व्यवस्था को बेहतर बनाए रखें। पुलिस के पास आने वाले लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना और नियमानुसार आवश्यक कदम उठाना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है। ऐसे में सभी पदाधिकारियों को अपने कार्यों के प्रति सजग रहने की जरूरत है।
–थाना की कार्यप्रणाली पर रहा विशेष ध्यान
उल्लेखनीय है कि थाना किसी भी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम नागरिकों की शिकायतों के समाधान का महत्वपूर्ण केंद्र होता है। ऐसे में थाना की आंतरिक व्यवस्था, पुलिसकर्मियों की ड्यूटी और अनुसंधान कार्यों की समीक्षा को पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली का अहम हिस्सा माना जाता है। एसपी के निरीक्षण के दौरान इन सभी पहलुओं का जायजा लिया गया और उपस्थित पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। गुरुवार की देर रात हुए इस निरीक्षण के दौरान डीएसपी मनीष आनंद, पर्यवेक्षी पदाधिकारी निर्भय कुमार राय, रक्सौल थानाध्यक्ष रमेश कुमार महतो, रवि कुमार, विकास कुमार पासवान, दीपक कुमार गिरि, प्रेम कुमार, जेबा प्रवीन, शंभू दास सहित अन्य पुलिस पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।
जन सुराज की ओर से शिक्षक मतदाताओं के लिए की गई थी मुकम्मल व्यवस्था
सुगौली। बिहार विधान परिषद के सारण शिक्षक एमएलसी निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर सुगौली प्रखंड में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। जन सुराज पार्टी की ओर से पार्टी समर्थित उम्मीदवार अफाक अहमद के समर्थन में मतदान करने पहुंचे शिक्षक मतदाताओं की सुविधा के लिए बैठने की उत्तम व्यवस्था की गई। इस पहल का उद्देश्य मतदान के दौरान शिक्षकों को सुविधा उपलब्ध कराना और उनके लिए बेहतर इंतजाम सुनिश्चित करना था।
जन सुराज पार्टी की ओर से की गई इस व्यवस्था में प्रखंड स्तर के पदाधिकारी और चुनाव प्रबंधन समिति के सदस्य सक्रिय रूप से जुटे रहे। इस दौरान प्रखंड अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह,वरिष्ठ नेता नूरुल होला कुरैशी तथा प्रखंड महासचिव धीरज श्रीवास्तव की मौजूदगी रही।
इनके साथ चुनाव प्रबंधन समिति के सदस्य दिवाकर दुबे,संदीप मिश्रा,अंगद सहनी, बशीरूल हक और अमित भारत भी उपस्थित थे। चुनाव के दौरान शिक्षकों की आवाजाही और मतदान प्रक्रिया को लेकर कार्यकर्ता सक्रिय नजर आए। पार्टी पदाधिकारियों एवं समिति के सदस्यों की उपस्थिति से चुनाव प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों में भी सहयोग मिला। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में कार्यकर्ताओं की सक्रियता देखने को मिली।
धान की कटाई के दौरान मिला नौ फीट लंबा अजगर, ग्रामीणों में कौतूहल
– वन विभाग की टीम ने मशक्कत के बाद किया रेस्क्यू
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तुरकौलिया/सनमार्ग सं। थाना क्षेत्र के तुरकौलिया पूर्वी पंचायत के पिपरिया गांव में शुक्रवार को धान की कटाई के दौरान करीब नौ फीट लंबा अजगर मिलने से ग्रामीणों में कौतूहल मच गया। खेत में विशालकाय अजगर दिखाई देने के बाद वहां काम कर रहे मजदूरों के बीच अफरातफरी की स्थिति बन गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।
जानकारी के अनुसार, पिपरिया निवासी सुभाष कुमार के खेत में धान की कटाई चल रही थी। इसी दौरान खेत में काम कर रहे मजदूरों की नजर अचानक एक विशाल अजगर पर पड़ी। करीब नौ फीट लंबे अजगर को देखकर मजदूर सतर्क हो गए और खेत से दूर हट गए। लोगों की आवाजाही और शोरगुल बढ़ने पर अजगर धान के बोझे के बीच जाकर छिप गया।
अजगर सांप के मिलने की खबर कुछ ही देर में पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद खेत के आसपास ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। लोग दूर से अजगर को देखने का प्रयास करते रहे। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी।
सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने काफी मशक्कत के बाद धान के बोझे के बीच छिपे अजगर को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। इसके बाद वन विभाग की टीम अजगर को अपने साथ ले गई।
अजगर के पकड़े जाने के बाद खेत में काम कर रहे मजदूरों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में पहली बार इतने बड़े अजगर को करीब से देखा गया। इसके कारण पूरे इलाके में दिनभर यह घटना चर्चा का विषय बनी रही।
6- बचपन बचाओ अभियान अंतर्गत कक्षा 1 से 5 तक के विद्यालयों में पॉक्सो एक्ट जागरूकता पर जोर
– जिले के प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को किया गया प्रेरित
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मोतिहारी/ सनमार्ग संवाददाता। बचपन बचाओ अभियान के तहत विद्यालयों में पॉक्सो एक्ट के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम के दूसरे दिन जिले के कक्षा एक से पांच तक के विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को संबोधित कर जागरूकता के लिए प्रेरित किया गया। महात्मा गांधी प्रेक्षागृह, मोतिहारी में आयोजित कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, के सचिव न्यायाधीश नितिन कुमार त्रिपाठी ने बच्चों को यौन शोषण एवं उत्पीड़न से बचाने और उनके अधिकारों की जानकारी दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को अपनी सुरक्षा, व्यक्तिगत सीमाओं तथा सुरक्षित और असुरक्षित व्यवहार की जानकारी होनी चाहिए। बच्चों को यह विश्वास दिलाना जरूरी है कि किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार की स्थिति में वे बिना डर अपने अभिभावक, शिक्षक या किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी दे सकते हैं। प्रशिक्षित शिक्षक-शिक्षिकाएं विद्यालयों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों को उनकी उम्र के अनुरूप पॉक्सो एक्ट, बाल सुरक्षा और अधिकारों की जानकारी देंगे। इसके लिए नुक्कड़ नाटक, निबंध प्रतियोगिता, वाद-विवाद तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों का सहारा लिया जाएगा। जबकि बच्चों की सुरक्षा कार्यक्रम में बच्चों को किसी भी अनुचित व्यवहार के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित करने तथा उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुनने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
पॉक्सो एक्ट, 2012 अठारह वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण प्रदान करने वाला कानून है। विद्यालयों में सरल भाषा और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को इसके प्रति जागरूक किया जाएगा, ताकि वे असुरक्षित परिस्थितियों को पहचान सकें और जरूरत पड़ने पर सहायता मांग सकें। कार्यक्रम में जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन गिरी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी माध्यमिक उमेश कुमार, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मोतिहारी अफरोज आलम तथा शिक्षा विभाग से रेयाज अहमद, शकील अहमद और अमरेश कुमार समेत अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं प्रशिक्षक उपस्थित थे।
7- राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत चिरैया में रात्रि जांच अभियान शुरू, पहले दिन 80 लोगों के लिए गए रक्त के नमूने
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-सिविल सर्जन ने 20 वर्ष से ऊपर के सभी लोग काराएं जांचः सिविल सर्जन
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मोतिहारी/सनमार्ग सं। राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले के चिरैया प्रखंड स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर सेनवरिया एकौना के पास गुरुवार की रात ‘नाइट ब्लड सर्वे’ (एनबीएस) अभियान की शुरुआत की गई। सेंटिनल साइट पर आयोजित इस शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम और सीएचओ लेड रोगी हितधारक मंच के सदस्यों द्वारा सघन जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसके बाद पहले दिन कुल 80 लोगों के रक्त के नमूनों की जांच की गई।
जांच अभियान के दौरान सीएचओ, पीएसपी सदस्य, आशा, एएनएम, वार्ड सदस्य और शिक्षकों ने ग्रामीणों को मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने, घर के आसपास साफ-सफाई रखने तथा सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) के समय समय पर दवा खाने के लिए प्रेरित किया। वहीं नए व पुराने हाथीपांव के मरीजों को अंग की स्वच्छता बनाए रखने और नियमित व्यायाम के तरीके सिखाए गए। शिविर में ग्रामीणों के मन में फाइलेरिया को लेकर उठ रहे सवालों और भ्रांतियों को भी दूर किया गया। “स्वस्थ होने पर जांच क्यों जरूरी है?” और “दवा खाने से क्या लाभ है?” जैसे सवालों के जवाब स्वास्थ्य कर्मियों ने दिए। डीवीडीसीओ डॉ. निकेश कुमार सिंह ने बताया कि चिरैया व संग्रामपुर सहित जिले के विभिन्न प्रखंडों में स्वास्थ्य विभाग, सहयोगी संस्थाओं (पिरामल, सिफार) और जनप्रतिनिधियों के समन्वय से यह अभियान चलाया जा रहा है, ताकि फाइलेरिया परजीवी से संक्रमित लोगों की समय रहते पहचान हो सके। सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार एवं डीआईओ डॉ. शरत चन्द्र शर्मा ने बताया कि फाइलेरिया एक अत्यंत गंभीर और लाइलाज बीमारी है, जिससे बचाव का एकमात्र उपाय समय पर दवा का सेवन है। इस बीमारी में हाथीपांव और हाइड्रोसील जैसी स्थायी दिव्यांगता आ जाती है। इसके परजीवी दिन में शरीर के अंदर सुप्त अवस्था में रहते हैं और रात 8 बजे के बाद ही रक्त संचार में सक्रिय होते हैं, इसलिए इसकी जांच रात के समय की जाती है। जांच में पॉजिटिव पाए जाने वाले लोगों का तत्काल उपचार शुरू किया जाता है। डब्लूएचओ की जोनल कोऑर्डिनेटर माधुरी देवराजू ने कहा कि फाइलेरिया संक्रमित क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है, जो गंदे और ठहरे हुए पानी में पनपते हैं। यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है।
इस अवसर पर सीएचओ रोहित राज, महेश यादव, एएनएम पूनम कुमारी, लैब टेक्नीशियन इश्त्याक अहमद, आशा कार्यकर्ता गिरजा देवी, पूर्व वार्ड सदस्य मणिभूषण प्रसाद, फैसिलिटेटर सीमा देवी, पिरामल प्रतिनिधि पप्पू कुमार, सिफार प्रतिनिधि सिद्धांत कुमार समेत कई स्वास्थ्यकर्मी व ग्रामीण उपस्थित थे।
8- मधुबन में स्वर्ण व्यवसायी से ठगी का प्रयास, कागज का बंडल थमाकर रुपये झपटते समय बदमाश धराया
-लोगों ने मारपीट के बाद पुलिस के हवाले सौंपा
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मोतिहारी/सनमार्ग संवाददाता। जिले के मधुबन थाना क्षेत्र में अपराधियों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की सतर्कता से एक बड़ी वारदात टल गई। स्टेट बैंक के पास से रुपये निकालकर लौट रहे एक स्वर्ण व्यवसायी को शातिर बदमाशों ने अपना निशाना बनाया। बदमाशों ने व्यवसायी को रुपयों के थैले की जगह कागज का बंडल थमाकर असली रुपये उड़ाने की कोशिश की। हालांकि, व्यवसायी की सूझबूझ और स्थानीय लोगों की मुस्तैदी के कारण एक बदमाश रंगेहाथ दबोच लिया गया, जबकि उसका दूसरा साथी मौके से फरार होने में कामयाब रहा। घटना मधुबन थाना क्षेत्र स्थित स्टेट बैंक के पास की है। तालिमपुर गांव के रहने वाले स्वर्ण व्यवसायी जगन्नाथ साह बैंक से कैश की निकासी कर बाहर निकल रहे थे। इसी दौरान शातिर अंदाज में बदमाशों ने उन्हें अपनी ठगी का शिकार बनाने की साजिश रची। बदमाशों ने बड़ी सफाई से व्यवसायी के हाथ में रुपयों के पैकेट की जगह कागज का बंडल थमाने का प्रयास किया, ताकि वे असली नकदी लेकर चंपारण हो सकें। लेकिन व्यवसायी ने समय रहते इस बड़ी साजिश को भांप लिया और सतर्कता दिखाई। जैसे ही स्वर्ण व्यवसायी जगन्नाथ साह को बदमाशों की इस शातिर हरकत का अहसास हुआ, उन्होंने तुरंत हो-हल्ला शुरू कर दिया। व्यवसायी की आवाज सुनकर आसपास के लोग और राहगीर मौके पर दौड़ पड़े। लोगों ने भागने की कोशिश कर रहे बदमाश को अशोक चौक के पास खदेड़कर दबोच लिया। पकड़े गए आरोपी की पहचान केसरिया थाना क्षेत्र के चांद परसा गांव निवासी दारोगा सहनी के दिव्यांग पुत्र राजू सहनी के रूप में हुई है। हालांकि, इस दौरान उसका दूसरा साथी छेदी भगत मौके से फरार होने में सफल रहा। अशोक चौक के पास रंगेहाथ पकड़े गए शातिर बदमाश को देखकर स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। भीड़ ने पकड़े गए दिव्यांग आरोपी राजू सहनी की जमकर पिटाई कर दी। तत्पश्चात घटना की सूचना पुलिस की डायल 112 टीम को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचकर भीड़ के चंगुल से आरोपी को सुरक्षित अपने कब्जे में लेकर थाने ले आई। पुलिस अब फरार चल रहे दूसरे साथी की तलाश में छापेमारी कर रही है। मामले में मधुबन थानाध्यक्ष प्रवीण कुमार पांडेय ने जानकारी दी है कि स्थानीय लोगों द्वारा पकड़े गए युवक को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। पुलिस ने पीड़ित स्वर्ण व्यवसायी से लिखित आवेदन की मांग की है। थानाध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि आवेदन मिलने के बाद मामले में आगे की विधि सम्मत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस ठगी और चोरी की घटना में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
9–घोड़ासहन में मीशो कंपनी के दो डिलीवरी बॉय को घात लगाए अपराधियों ने चाकू से गोदा, गंभीर
पुलिस खंगाल रही सीसीटीवी, अपराधियों की धर पकड़ को लेकर छापेमारी तेज
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मोतिहारी/सनमार्ग संवाददाता। जिले के घोड़ासहन थाना क्षेत्र में बेखौफ बदमाशों ने दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया है। कॉलेज गेट के पास गुरुवार की रात घात लगाए करीब आधा दर्जन बदमाशों ने ई-कॉमर्स कंपनी मीशो के दो डिलीवरी बॉय पर चाकू से जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित युवकों की पहचान गोबरिया टोला निवासी विकास कुमार यादव और राजू यादव के रूप में हुई है। दोनों युवक रोज की तरह अपना काम निपटाकर कार्यालय से घर लौट रहे थे। इसी दौरान कॉलेज गेट के पास पहले से घात लगाए बैठे आधा दर्जन के करीब युवकों ने उन्हें घेर लिया और उन पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में एक युवक के सीने और दूसरे युवक की पीठ पर गहरा घाव लगा है। चाकूबाजी की इस घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से दोनों घायलों को तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए मोतिहारी रेफर कर दिया गया। घायलों में राजू यादव की हालत अत्यंत चिंताजनक बताई जा रही है, जिसका इलाज जारी है। थानाध्यक्ष अमरजीत कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला प्रेम-प्रसंग और आपसी विवाद से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है। पुलिस के अनुसार, एक डिलीवरी बॉय कुछ समय पहले पुरनहिया गांव में पार्सल डिलीवर करने गया था। वहां सामान डिलीवरी के वक्त ओटीपी लेने के दौरान युवती का मोबाइल नंबर लिए जाने और बाद में उस पर मैसेज भेजने का आरोप सामने आया है। इसी रंजिश को लेकर युवकों ने उन पर हमला कर दिया.पुलिस जांच में पता चला है कि इस घटना में शामिल संदिग्ध युवक कुंडवा चैनपुर थाना क्षेत्र के बरवा खुर्द के रहने वाले हैं। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद आरोपियों की पहचान करने का दावा किया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए उनके संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है और जल्द ही सभी आरोपी सलाखों के पीछे होंगे।
10- सारण शिक्षक निर्वाचन का मतदान शांतिपूर्ण संपन्न, 69 में 64 मतदाताओं ने किया मतदान
-बूथ संख्या 42 पर सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजामात, अधिकारियों की निगरानी में शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई मतदान प्रक्रिया
रक्सौल/सनमार्ग संवाददाता। सारण शिक्षक निर्वाचन चुनाव को लेकर प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में बनाए गए मतदान केंद्र संख्या 42 पर शुक्रवार को शांतिपूर्ण माहौल में मतदान संपन्न हुआ। मतदान को लेकर प्रशासन की ओर से आवश्यक तैयारियां की गई थी। पूरे मतदान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ मतदान प्रक्रिया पर भी नजर रखी गई। प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर स्थित बूथ संख्या 42 पर कुल 69 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें से 64 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस प्रकार मतदान केंद्र पर मतदाताओं की अच्छी भागीदारी देखने को मिली। मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। इस संबंध में ब्राजाइटिंग ऑफिसर सह बंजरिया अंचलाधिकारी कृष्ण प्रसाद सिंह ने बताया कि सारण शिक्षक निर्वाचन का मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया। मतदान के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी। अधिकारियों एवं जवानों की मौजूदगी में मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी कराई गई। मौके पर एसआई लालबहादुर, दीनदयाल प्रसाद, विकास कुमार पासवान सहित अन्य पुलिस जवान कमान संभाले रहे।
11- कोटवा बड़हरवा मिडिल स्कूल में टला बड़ा हादसा, सब्जी में मिला छिपकली
बच्चों के खाने से पहले फेंकी गई छिपकली वाली सब्जी
जांच में पहुंचे डीपीओ और एमडीएम डीपीएम ने बच्चों के साथ बैठकर खाया खाना
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कोटवा/सनमार्ग संवाददाता। प्रखंड मुख्यालय स्थित कोटवा बड़हरवा मध्य विद्यालय में शुक्रवार को मध्याह्न भोजन में छिपकली मिलने से एकबारगी विद्यालय में हड़कंप मच गया। घटना के बाद विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा और मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए। हालांकि,सब्जी में छिपकली मिली थी, जिसे देखते ही सब्जी को फेंक दिया गया।इसके बाद आनन फानन में फिर से सब्जी तैयार कराया गया।राहत की बात यह रही कि किसी भी बच्चे ने छिपकली वाला भोजन नहीं खाया, जिससे बड़ी अनहोनी होने से बच गई। घटना की सूचना मिलते ही डीपीओ शिव कुमार और एमडीएम डीपीएम गोपाल कृष्णा विद्यालय पहुंचे और पूरे मामले की जांच की। जांच के दौरान अधिकारियों ने अपनी निगरानी में भोजन तैयार करवाया। इसके बाद दोनों अधिकारियों ने बच्चों के साथ बैठकर भोजन भी किया।अधिकारियों ने बताया कि रसोइया की सूझबूझ से संभावित खतरे को टालने में मदद मिली। जांच के दौरान मध्याह्न भोजन निर्धारित मेन्यू के अनुसार नहीं बनाए जाने की बात भी सामने आई। अधिकारियों ने कहा कि विद्यालय में प्रत्येक दिन एक शिक्षक को बच्चों के साथ बैठकर मध्याह्न भोजन करना चाहिए, ताकि भोजन की गुणवत्ता और बच्चों को परोसे जाने वाले खाने की निगरानी हो सके।विद्यालय में गंदगी देखकर अधिकारियों ने प्रधानाध्यापक को फटकार लगाई। विद्यालय में लकड़ी पर भोजन बनते देख प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण मांगने की बात कही गई।इस घटना ने मध्याह्न भोजन योजना के संचालन और विद्यालय की व्यवस्था सहित विभाग पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग के अधिकारी भी स्कूलों में तभी पहुंचते है जब इस तह का मामला होता है , नियमित औचक निरीक्षण से निश्चित रूप से विद्यालयों में हर एक पहलू पर सुधार दिखेगा। जाहिर तौर पर बच्चों के जीवन और भविष्य के निर्माण स्थली के प्रति जवाबदेही तय होनी जाहिए। जिसमें स्वच्छता , बेहतर शिक्षा सहित गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए लगातार पहल होनी चाहिए।
12- क्रिकेट एसोसिएशन के बीच द्वंद, कोर्ट का फैसला निर्णायक
मोतिहारी/सं सं। जिला क्रिकेट एसोसिएशन के अंतर्गत पंजीकृत सभी खिलाड़ियों, अंपायरों, स्कोररों, पदाधिकारियों एवं अन्य संबंधित को अध्यक्ष ने आगाह किया है। फिलहाल यहां क्रिकेट एसोसिएशन को लेकर द्वंद है बावजूद इसके न्यायालय का फैसला सर्वोच्च माना जाएगा। लिहाजा चंपारण प्रीमियर लीग पूर्वी चम्पारण जिला क्रिकेट एसोसिएशन किसी भी प्रकार की मान्यता अथवा अनुमति प्रदान नहीं करने की बात बताई है। दो पक्षों की दावेदारी के बीच एक पक्ष दें बयान जारी कर कहा है कि एसोसिएशन के सभी संबंधित सदस्यों एवं हितधारकों को निर्देशित किया जाता है कि वे उक्त टूर्नामेंट में भाग न लें और न ही प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़ी किसी गतिविधि में संलिप्त हों। जबकी जिला क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मिश्रा ने बताया की
यदि कोई खिलाड़ी, अंपायर, स्कोरर, पदाधिकारी अथवा अन्य संबंधित व्यक्ति उक्त टूर्नामेंट में भाग लेते हुए या उससे जुड़ी गतिविधियों में संलिप्त पाये जाते है, तो उसके विरुद्ध पूर्वी चंपारण क्रिकेट एसोसिएशन के द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
13- छतौनी पुलिस ने शराब के साथ तीन गिरफ्तार
मोतिहारी/सं सं। शराब माफियाओ पर मोतिहारी पुलिस की लगातार कार्रवाई जारी है। एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर उनके विरुद्ध हर संभव शिकंजा कसा जा रहा है। इस कड़ी में गुप्त सूचना पर छतौनी थानाध्यक्ष अमित कुमार सिंह की अगुवाई में पुलिस ने शराब कारोबारियों को ई रिक्शा पर चोरी से शराब सप्लाई करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया गया।शराब के साथ पकड़ाए व्यक्तियों में नीरज कुमार बेलबनवा मोतिहारी नगर थाना ,
पवन कुमार मधुबन , रामु कुमार रुपहरी शिकारगंज शामिल है।
उक्त सभी को एक ई-रिक्शा और एक मोटरसाइकिल के साथ 6 पिस अंग्रेजी शराब का बोतल , जिसकी कुल मात्रा 04.50 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद किया गया। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर अग्रेतर कारवाई शुरू कर दी है।
14- कभी नेपाल की सत्ता के शिखर पर थे पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा
आज क्षतिग्रस्त आवास याद दिला रहा जीवन के संघर्ष, त्याग और अनिश्चितता की कहानी
बिनोद कुमार सिंह
फोटो 12
मोतिहारी /सनमार्ग ब्यूरो। राजनीति में समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। आज शिखर पर पहुंचा व्यक्ति कल कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए विवश हो सकता है। आज साथ दिखाई देने वाली भीड़ कल छट सकती है। आज जिस घर को सुरक्षित माना जाता है, वही अचानक असुरक्षा का प्रतीक बन सकता है। लेकिन किसी भी व्यक्ति के जीवन का मूल्यांकन केवल उसकी वर्तमान परिस्थिति के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए उसके जीवन-संघर्ष, अनुभवों, पीड़ाओं और देश की राजनीतिक यात्रा में उसकी भूमिका को भी समझना आवश्यक है। नेपाली कांग्रेस के पूर्व सभापति तथा पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा के जीवन में दिखाई देने वाली वर्तमान परिस्थितियों को भी इसी मानवीय दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। दशकों तक नेपाल की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले देउवा आज अपने निजी आवास में हुए नुकसान से जुड़ी कठिन परिस्थितियों के संदर्भ में चर्चा में हैं। कभी देश की सत्ता और राजनीति के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले बूढ़ानीलकंठ स्थित उनके आवास को पहुंची क्षति केवल एक भौतिक संरचना की दुर्दशा नहीं दर्शाती, बल्कि जीवन में आने वाले अप्रत्याशित संकटों की गंभीरता का भी एहसास कराती है।
-बूढ़ानीलकंठ का घर : केवल ईंट, पत्थर और सीमेंट नहीं, स्मृतियों का संसार
एक घर केवल दीवारों, खिड़कियों, दरवाजों और छत से बनी संरचना नहीं होता। उससे परिवार की स्मृतियां जुड़ी होती हैं, सुख-दुःख की कहानियां बसी होती हैं और जीवन के अनगिनत क्षण सुरक्षित रहते हैं। वर्षों की मेहनत से बनाए गए घर में परिवार के सपने, आत्मीयता और जीवन के अनेक अनुभव समाहित होते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा का बूढ़ानीलकंठ स्थित आवास भी उनके लिए केवल एक निजी निवास नहीं, बल्कि लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान हुई अनेक मुलाकातों, चर्चाओं, निर्णयों और स्मृतियों से जुड़ा स्थान है। वहाँ आने वाले नेताओं, कार्यकर्ताओं, शुभचिंतकों तथा विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के साथ हुई मुलाकातों ने भी उस घर को अपना एक राजनीतिक इतिहास दिया है। लेकिन आज उसी घर को क्षतिग्रस्त अवस्था में देखना अपने आप में दुखद दृश्य है। कभी व्यवस्थित और सुरक्षित दिखाई देने वाले आवास को इस स्थिति में देखकर उससे जुड़ी स्मृतियों और भावनाओं के बारे में सोचने के लिए विवश होना पड़ता है। भौतिक क्षति की मरम्मत की जा सकती है, भवन का पुनर्निर्माण संभव है, लेकिन भावनात्मक चोटों को भरने में समय लग सकता है।
-राजनीति का लंबा सफर और जीवन के कठिन मोड़
शेरबहादुर देउवा का राजनीतिक जीवन अनेक उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। विद्यार्थी राजनीति से सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करने वाले देउवा नेपाली कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे। उन्होंने कई बार प्रधानमंत्री का दायित्व संभाला और नेपाल के लोकतांत्रिक अभ्यास, संसदीय राजनीति तथा सत्ता परिवर्तन के विभिन्न चरणों के साक्षी बने।
उनके राजनीतिक जीवन में उपलब्धियाँ भी हैं और आलोचनाएं भी। समर्थकों की दृष्टि में वे लंबे संघर्ष से स्थापित नेता हैं, जबकि आलोचकों के लिए उनकी कार्यशैली और राजनीतिक निर्णय प्रश्नों के विषय रहे हैं। लोकतंत्र में किसी राजनीतिक व्यक्तित्व का अलग-अलग दृष्टिकोणों से मूल्यांकन होना स्वाभाविक है। लेकिन राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं और मानवीय संवेदना अपनी जगह। किसी व्यक्ति से राजनीतिक असहमति रखने का अर्थ उसके दुःख के प्रति असंवेदनशील होना नहीं है। लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति को भी निजी संकट, असुरक्षा और पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे समय में मानवीय सहानुभूति व्यक्त करना लोकतांत्रिक संस्कार का ही एक महत्वपूर्ण पक्ष है।
-संकट की घड़ी में सबसे बड़ी चीज मानवीय संवेदना
जेन-जी आंदोलन के दौरान हुई क्षति से जुड़ी घटनाओं ने देश के विभिन्न पक्षों को गंभीर सवालों के सामने खड़ा किया है। आंदोलन, असंतोष और राजनीतिक परिवर्तन से संबंधित बहसें अपनी जगह हैं। लेकिन परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, निजी संपत्ति को पहंची क्षति, परिवार की असुरक्षा और व्यक्ति के मन पर पड़ने वाले आघात को हल्के में नहीं लिया जा सकता। जब कोई घर क्षतिग्रस्त होता है, तो केवल उसकी संरचना प्रभावित नहीं होती। उससे जुड़े परिवार का दैनिक जीवन, सुरक्षा और भावनात्मक संसार भी प्रभावित होता है। लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में रहे किसी व्यक्ति के आवास में ऐसी घटना होने पर राजनीतिक जगत में चर्चा होना स्वाभाविक है, लेकिन इसे केवल राजनीतिक व्यंग्य या व्यक्तिगत अपमान का विषय बनाना उचित नहीं है। अलबत्ता शेरबहादुर देउवा भी अंतत एक परिवार के सदस्य हैं। वे राजनीतिक नेता हैं, पूर्व प्रधानमंत्री हैं और नेपाली कांग्रेस के पूर्व सभापति हैं। लेकिन इन सभी परिचयों से परे वे भी एक ऐसे इंसान हैं, जो सुख-दुःख का अनुभव करते हैं। उनके राजनीतिक जीवन का मूल्यांकन इतिहास करेगा, लेकिन वर्तमान क्षति के प्रति संवेदना व्यक्त करना मानवीय कर्तव्य है।
-सत्ता से बड़ा जीवन, पद से बड़ी मानवीय गरिमा
राजनीति में पद और शक्ति स्थायी नहीं होते। सरकारें बदलती हैं, नेतृत्व बदलता है, राजनीतिक समीकरण बदलते हैं और समय के साथ प्रभाव का स्वरूप भी बदल जाता है। लेकिन इन परिवर्तनों के आधार पर किसी व्यक्ति के संपूर्ण जीवन को किसी एक घटना तक सीमित नहीं किया जा सकता।
शेरबहादुर देउवा के राजनीतिक जीवन को भी आज उनके क्षतिग्रस्त आवास की तस्वीर तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उनके लंबे राजनीतिक जीवन, संघर्षों, प्राप्त जिम्मेदारियों और देश की लोकतांत्रिक यात्रा में निभाई गई भूमिका का समग्र मूल्यांकन आवश्यक है। उनसे असहमत लोग भी इतिहास और वर्तमान परिस्थितियों का संतुलित दृष्टिकोण से आकलन कर सकते हैं।
किसी समय शक्तिशाली रहे व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में देखकर उसका उपहास करना आसान होता है। लेकिन वास्तविक मानवीयता तब दिखाई देती है, जब हम दूसरे के दुःख को राजनीतिक लाभ या मनोरंजन का विषय बनाने के बजाय उसकी गंभीरता को समझने का प्रयास करते हैं।
आज के संकट ने देउवा के जीवन में नई चुनौतियां खड़ी की होंगी। लेकिन कठिन परिस्थितियाँ जीवन का अंतिम निष्कर्ष नहीं होतीं। समय के साथ घाव भर सकते हैं, क्षतिग्रस्त संरचनाओं का पुनर्निर्माण हो सकता है और जीवन फिर से नई राह पकड़ सकता है। समय हर किसी को कुछ न कुछ सिखाता है। वह शक्तिशाली व्यक्ति को उसकी सीमाओं का एहसास कराता है, समाज को मानवीय संवेदना का महत्व समझाता है और राजनीति को जिम्मेदारी का अर्थ याद दिलाता है। लेकिन समय से मिलने वाले इस सबक को किसी की पीड़ा पर हँसने का माध्यम नहीं बनाना चाहिए।
शेरबहादुर देउवा के बूढ़ानीलकंठ स्थित आवास को पहुँची क्षति एक गंभीर संदेश देती है—सार्वजनिक जीवन में चाहे कोई कितना भी बड़ा स्थान क्यों न हासिल कर ले, कोई भी व्यक्ति अप्रत्याशित घटनाओं से पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता। इसलिए पद और प्रतिष्ठा की चर्चा के साथ-साथ मानवीय गरिमा, व्यक्तिगत सुरक्षा और सामाजिक सहिष्णुता को भी समान महत्व देना चाहिए।
राजनीतिक प्रतिस्पर्धा चलती रहेगी। विचारों पर बहस होती रहेगी। नेतृत्व से सवाल पूछे जाते रहेंगे और इतिहास सभी का मूल्यांकन करता रहेगा। लेकिन इन सबके बीच मानवता का लोप नहीं होना चाहिए। देउवा की राजनीतिक विरासत के बारे में इतिहास अपना निष्कर्ष निकालेगा। उनके निर्णयों पर बहस होगी और उनकी उपलब्धियों तथा कमियों की समीक्षा की जाएगी। लेकिन उनके जीवन में आए इस संकट को देखते हुए एक बात याद रखनी चाहिए—राजनीतिक असहमति कितनी भी गहरी क्यों न हो, दुःख की घड़ी में मानवीय संवेदना कमजोर नहीं पड़नी चाहिए।
क्योंकि नेता भी आखिर इंसान ही होते हैं। पद अस्थायी हो सकते हैं, सत्ता बदल सकती है और समय नए मोड़ ले सकता है, लेकिन कठिन परिस्थितियों में दिखाई गई मानवीयता ही किसी समाज की वास्तविक सभ्यता और संस्कारों की पहचान होती है।

