हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से हाहाकार, 628 से अधिक फीडर प्रभावित
बिजली कर्मचारियों से अनिल विज की अपील, काम पर लौटें; सभी विकल्पों पर बातचीत को तैयार
चंडीगढ। हरियाणा बिजली नियामक आयोग द्वारा गुरुग्राम और नूंह में बिजली आपूर्ति के लिए निजी क्षेत्र की कंपनी को लाइसेंस जारी करने के फैसले के विरोध में कर्मचारियों की हड़ताल से प्रदेश में बिजली संकट गहरा गया है।कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप होने के बाद भी उसे बहाल नहीं किया जा रहा है। बिजली संकट का असर पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।
बीते 24 घंटे के दौरान हरियाणा में 33 केवी के 118 और 11 केवी के 510 से ज्यादा फीडर का ब्रेक डाउन रहा। भिवानी में सबसे सबसे ज्यादा 280 फीडर बंद रहे।करनाल, भिवानी, यमुनानगर व अम्बाला के कई इलाकों में 28 घंटे बाद भी बिजली सप्लाई बहाल
नहीं हो पाई। देर रात गुरुग्राम, फरीदाबाद और
सिरसा में लोगों ने जाम लगाकर जमकर हंगामा किया।
शुक्रवार को हड़ताल के दूसरे दिन भी हालात जस के तस ही नजर आए। हिसार के पॉश इलाकों में 24 घंटे से बिजली गुल है। झज्जर में सीएनजी पेट्रोल पंप भी बंद कर दिए गए है। इस बीच, शुक्रवार की सुबह हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने सोशल मीडिया एक्स पर एक
पोस्ट डालकर कर्मचारियों को काम पर लौटने की अपील की।
विज ने हरियाणा में हड़ताल पर गए कर्मचारियों से अपील है कि वह काम पर वापस लौट आएं। सभी विकल्पों पर बातचीत के लिए हम तैयार हैं। इसमें इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 108 पर कार्रवाई करना भी शामिल है।
विज की इस पोस्ट के बाद नई बहस शुरू हो गई है। विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 राज्य सरकार को राज्य विद्युत नियामक आयोग को नीतिगत मामलों पर लिखित निर्देश देने की शक्ति प्रदान करती है।अपने कार्यों का निर्वहन करते समय राज्य विद्युत नियामक आयोग जनहित से जुड़े नीतिगत मामलों पर राज्य सरकार द्वारा दिए गए लिखित निर्देशों से निर्देशित होगा।
यदि कोई प्रश्न उठता है कि कोई निर्देश जनहित से जुड़े नीतिगत मामले से संबंधित है या नहीं, तो उस पर राज्य सरकार का निर्णय अंतिम होगा।हालांकि राज्य सरकार आयोग को नीतिगत मामलों पर निर्देश दे सकती है, लेकिन उच्चतम न्यायालय के अनुसार नियामक आयोग राज्य सरकार के हर आदेश से पूरी तरह बाध्य नहीं होता और यह न्यायिक विवेक व अधिनियम के दायरे में काम करता है।

