फरक्का बैराज हटाने और गंगा की अविरलता को लेकर दो दिवसीय जन संवाद संपन्न, विजन ड्राफ्ट पारित
भागलपुर। फरक्का बैराज को हटाया जाए और जब तक यह नहीं हटता, तब तक बांग्लादेश के साथ गंगा जल बंटवारा संधि को जारी रखा जाए। इस विजन स्टेटमेंट के साथ ‘गंगा मुक्ति आंदोलन’ द्वारा आयोजित दो दिवसीय जन संवाद का रविवार को समापन हो गया।
फरक्का-बांग्लादेश जल समझौते पर केंद्रित इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार के नदी कार्यकर्ताओं, पर्यावरणविदों और बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया।
जन संवाद की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजकर्मी और टीएमबीयू के पूर्व डीएसडब्ल्यू डॉ. योगेंद्र ने की और संचालन उदय ने किया। बैठक में आए एक्टिविस्टों ने एकजुट होकर कहा कि वे हमेशा से नदी की अविरलता के पक्षधर रहे हैं।
फरक्का बराज से उत्पन्न समस्या को अलग करके नहीं देखा जा सकता। जब तक गंगा और उसकी सहायक नदियों को बंधन मुक्त नहीं किया जाएगा, तब तक गंगा मुक्त नहीं होगी। मालदा से आए गौतम पाल और खिदिर बक्स ने जमीनी हकीकत साझा करते हुए कहा कि गाद (सिल्ट) भरने के कारण गंगा उथली हो गई है, जिससे बाढ़ की विभीषिका बढ़ी है और मालदा के पास बड़े पैमाने पर कटाव हुआ है।
वक्ताओं ने कहा कि मछुआरे, किसान, दियारा और चौर के लोग इस बैराज के सबसे बड़े पीड़ित हैं। प्रसिद्ध नदीकर्मी एवं साहित्यकार जया मित्र ने इस मौके पर कहा कि बराज और जल संधि दो अलग-अलग मुद्दे हैं। नदी किसी देश या प्रदेश की सीमा नहीं मानती, इस पर सबका हक है।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आज पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है और ‘पानी का राष्ट्रवाद’ नाम की एक नई प्रक्रिया चल पड़ी है। बांग्लादेश, यूपी, बिहार, झारखंड और बंगाल का इस नदी पर बराबर का अधिकार है।
पर्यावरणविद घनश्याम ने सुझाव दिया कि इस संवाद प्रक्रिया में नेपाल को भी शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही फरक्का बराज और बांग्लादेश के बीच बनने वाली समिति में सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) को जगह मिलनी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान महेंद्र यादव और तापस दास ने आंदोलन का विजन ड्राफ्ट पेश किया, जिसे सदन ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इस दो दिवसीय संवाद को जीवंत बनाने में डॉ. रुचि श्री, गौतम, खिदिर बक्स, मनोज मीता, रोहित कुमार और उज्जवल घोष आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के अंत में नेपाल त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए एक मिनट का मौन रखकर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

