सौर तूफानों के व्यवहार से अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान में मिलेगी मदद, भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी खोज

सौर तूफानों के व्यवहार से अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान में मिलेगी मदद, भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी खोज
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नई दिल्ली। भारतीय वैज्ञानिकों ने सूर्य से आने वाले खतरनाक सौर विस्फोटों को लेकर महत्वपूर्ण अध्ययन किया है, जिससे भविष्य में अंतरिक्ष मौसम की सटीक भविष्यवाणी में मदद मिल सकती है।यह शोध भारतीय खगोल-भौतिकी संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है। इसमें 1995 से 2024 तक लगभग 30 वर्षों के अंतरिक्ष डेटा का विश्लेषण किया गया।

अध्ययन में बताया गया है कि सूर्य से निकलने वाले इंटरप्लेनेटरी कोरोनल मास इजेक्शन पृथ्वी के पास पहुंचकर सैटेलाइट, जीपी एस, रेडियो संचार और बिजली ग्रिड को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, ये पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों में सुंदर ऑरोरा भी उत्पन्न करते हैं।

शोध के अनुसार, अब तक यह माना जाता था कि ये सौर विस्फोट अंतरिक्ष में यात्रा के दौरान लगातार ठंडे हो जाते हैं लेकिन नया अध्ययन इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं मानता।वैज्ञानिकों ने पाया कि लगभग 45 प्रतिशत आईसीएमई अपने मार्ग में गर्म अवस्था में भी बने रहते हैं।

यह भी सामने आया कि सूर्य के अधिक सक्रिय चरण के दौरान ऐसे “हीटिंग सिग्नल” वाले सौर तूफान अधिक देखने को मिलते हैं। इसके अलावा अलग-अलग सौर चक्रों में इनके व्यवहार में बदलाव भी दर्ज किया गया है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, जो सौर तूफान पृथ्वी पर अधिक प्रभाव डालते हैं, वे अक्सर गर्म अवस्था में होते हैं और मजबूत चुंबकीय गुण प्रदर्शित करते हैं।यह अध्ययन नासा के ओमनी डेटाबेस और एल 1 प्वाइंट पर मौजूद उपग्रहों से प्राप्त लंबे समय के आंकड़ों पर आधारित है और अंतरराष्ट्रीय जर्नल एमएनआरएएस में प्रकाशित हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस शोध से भविष्य में सौर तूफानों की पहले से पहचान और चेतावनी प्रणाली को और मजबूत किया जा सकेगा, जिससे उपग्रहों, संचार नेटवर्क और बिजली प्रणाली को बेहतर सुरक्षा दी जा सकेगी।

anand prakash

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