नेपाल में प्रतिनिधि सभा की उपाध्यक्ष बनीं रूबी ठाकुर

नेपाल में प्रतिनिधि सभा की उपाध्यक्ष बनीं रूबी ठाकुर
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काठमांडू। नेपाल में संसद के निचल सदन प्रतिनिधि सभा की उपाध्यक्ष पद पर श्रम संस्कृति पार्टी की धनुषा जिले की सांसद 25 वर्षीय रूबी ठाकुर को निर्वाचित हुई।उनको प्रतिनिधि सभा के 275 सदस्यों में से 229 के मत मिले।

रूबी ठाकुर को उनकी पार्टी श्रम संस्कृति पार्टी के साथ-साथ सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी), प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस और नेपाली कम्यूनिस्ट पार्टी का समर्थन प्राप्त था। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ा, जबकि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) इस चुनाव में शामिल नहीं हुई।

रुबी ठाकुर साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं और सामाजिक चुनौतियों एवं पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच पली-बढ़ी हैं। उन्होंने कम उम्र में ही राजनीति में प्रवेश किया। उन्हें मधेसी जनजाति क्लस्टर से समानुपातिक सांसद के रूप में नामित किया गया था। उनके पिता सऊदी अरब में मजदूरी करते हैं, जबकि उनकी मां खेतों में काम करती हैं।

दसवीं की परीक्षा पूरा करने के बाद उन्होंने धनुषा जिले के बलरा पॉलिटेक्निक से तीन वर्षीय डिप्लोमा किया और एक आर्किटेक्चर कंसल्टेंसी फर्म में सात महीने तक काम किया, जहां उन्हें प्रतिमाह 20,000 रुपये वेतन मिलता था, जिसका एक हिस्सा वह परिवार के खर्च में देती थीं।

उनकी राजनीतिक यात्रा सोशल मीडिया के माध्यम से हर्क सांपांग की गतिविधियों से जुड़ने के बाद शुरू हुई। बाद में वह सक्रिय राजनीति में आईं और 5 मार्च के चुनाव में धनुषा-4 निर्वाचन क्षेत्र में श्रम संस्कृति पार्टी के समर्थन में प्रचार किया। उन्हें मधेसी जनजाति श्रेणी से समानुपातिक उम्मीदवार बनाया गया, जिससे वह अपनी पार्टी की सबसे कम उम्र की सांसद बनीं। आरएसपी के समर्थन से वह उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुईं।

ठाकुर ने सामाजिक न्याय, महिला सशक्तीकरण और दहेज एवं बाल विवाह जैसे मुद्दों पर काम करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रावधानों के बावजूद मधेश के कुछ हिस्सों में ये प्रथाएं अभी भी जारी हैं और वह इन मुद्दों को संसद में उठाएंगी।

संसदीय जिम्मेदारियों के साथ-साथ वह सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई भी कर रही हैं। देश की सबसे युवा सांसद होने के नाते वह उपाध्यक्ष के रूप में अपनी भूमिका का उपयोग सामाजिक सुधार और कुरीतियों के खिलाफ मजबूत कानून बनाने के लिए करना चाहती हैं।

anand prakash

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