विपक्ष के बहिर्गमन के बीच सीएपीएफ विधेयक राज्यसभा से पारित

विपक्ष के बहिर्गमन के बीच सीएपीएफ विधेयक राज्यसभा से पारित
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नई दिल्ली। विपक्ष के विरोध और बहिर्गमन के बीच बुधवार को राज्यसभा से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित हो गया। इस विधेयक पर चर्चा के बाद जवाब देते हुए गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि इस बिल का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा बलों की कार्य कुशलता और मनोबल को बढ़ाना है।यह विधेयक सीएपीएफ अधिकारियों की सेवा शर्तों में अस्पष्टताओं और प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

गृह राज्यमंत्री ने कहा कि सीएपीएफ का दायरा निरंतर बढ़ रहा है। इनके संचालन में असुविधाएं देखने को मिल रही थी। यह विधेयक कमांड पर आधारित है। सीएपीएफ में प्रतिनियुक्ति के आधार पर नियुक्ति की व्यवस्था विकसित हुई है। इनके लिए एक स्पष्ट ढांचा उपलब्ध कराया जाए इसलिए यह बिल लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के नियम वित्तीय लाभ की निरंतरता को सुनिश्चित करते हैं। यह विधेयक संघीय ढांचे को और मजबूत करता है। उन्होंने कहा ग्रुप ए के अधिकारियों को चार पदोन्नति मिलती है।

इससे पहले राज्यसभा में दोपहर दो बजे सीएपीएफ विधेयक पर चर्चा की शुरुआत साकेत गोखले ने की। उन्होंने सीएपीएफ अधिकारियों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि समान रैंक के सीएपीएफ अधिकारियों की तुलना में आईपीएस अधिकारियों का जीवन अधिक सुविधाजनक होता है।

साकेत गोखले ने यह भी आरोप लगाया कि इन बलों के प्रमुख के रूप में आईपीएस अधिकारियों को लाकर इन पर राजनीतिक नियंत्रण चाहते हैं।

सीएपीएफ (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) बिल के समर्थन में बोलते हुए भाजपा सांसद अजीत गोपछड़े ने कहा कि पहले जवानों को व्यवस्था से लड़ना पड़ता था लेकिन अब व्यवस्था जवानों के लिए काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी की सरकार उन समस्याओं का समाधान दे रही है, जहां पिछली सरकारों ने कमियां छोड़ी थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा कमजोर हुई थी।

अजीत गोपछड़े ने यह भी कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे राष्ट्रीय सुरक्षा से ज्यादा राजनीति की चिंता कर रहे हैं।

राज्यसभा में सदन के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सदस्य इस बिल पर और गहन जांच चाहते थे, इसलिए इसे समिति को भेजा जाना चाहिए था।

नारेबाज़ी के बीच विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सदन के नेता जेपी नड्डा ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उन्हें बहस में कोई रुचि नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले भी विपक्ष को चर्चा में कोई दिलचस्पी नहीं थी।

जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष संसदीय प्रक्रिया का सम्मान नहीं करता और उनकी यह कार्रवाई उसी का उदाहरण है।

उल्लेखनीय है कि सोमवार (30 मार्च 2026) को भी इस बिल पर चर्चा हुई थी, जिसमें विपक्ष ने कहा था कि यह विधेयक संवैधानिक मूल्यों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। विपक्ष ने मांग की थी कि इसे एक चयन समिति के पास भेजा जाए ताकि इसकी विस्तार से जांच हो सके। गुरुवार को यह विधेयक लोकसभा में पेश हो सकता है। इस नए कानून के तहत, सीएपीएफ में आईजी रैंक के 50 फीसदी पद और एडीजी रैंक के कम-से-कम 67 फीसदी पद आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित रहेंगे।

anand prakash

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