दिल्ली पुलिस मुख्यालय घेराव मामले में पीएमओ ने लिया संज्ञान, पुलिस कमिश्नर से मांगी रिपोर्ट
नई दिल्ली। गृह मंत्रालय ने सोमवार को जय सिंह रोड स्थित पुलिस मुख्यालय का घेराव और प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) मनस्वी वशिष्ठ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।मुख्यालय से भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर मंत्रालय ने सोमवार देर रात ही यह सख्त कार्रवाई कर दी।
मूलरूप से राजस्थान के रहने वाले मनस्वी वशिष्ठ 2019 बैच के दानिप्स अधिकारी हैं। आइआइटी, खड़गपुर से इन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया है। इस बीच, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर हैरानी जताते हुए पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
बीते दिनों वकीलों के कथित दबाव के चलते गांधी नगर सब डिवीजन के तत्कालीन सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के तत्कालीन एसएचओ अरुण कुमार का तबादला निष्क्रिय यूनिटों में कर दिया गया था।
इसी कार्रवाई के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय का घेराव किया था, जिसका नेतृत्व एसीपी मनस्वी वशिष्ठ कर रहे थे जिससे मंत्रालय ने उनपर यह कार्रवाई की।मंगलवार सुबह एसीपी के निलंबन की खबर आते ही पूरे पुलिस महकमे में सनसनी फैल गई। दिनभर थानों से लेकर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के कार्यालयों तक इसी कार्रवाई की चर्चा होती रही।
बेहद अनुशासित कार्यशैली के लिए पहचानी जाने वाली दिल्ली पुलिस के कर्मियों द्वारा अपने ही मुख्यालय का घेराव किए जाने के मामले को गृह मंत्रालय ने अत्यंत गंभीरता से लिया है।
मंत्रालय की कड़ी नाराजगी के बाद पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने मंगलवार दोपहर 12 बजे सभी विशेष आयुक्तों, संयुक्त आयुक्तों, अतिरिक्त पुलिस आयुक्तों और जिला डीसीपी की एक आपात बैठक बुलाई, जो अधिकारी मुख्यालय नहीं पहुंच सके, वे ऑनलाइन जुड़े।बैठक के दौरान पुलिस आयुक्त ने प्रदर्शन पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई।
करीब 45 मिनट चली बैठक में आयुक्त साफ कहा कि यह मामला रेंज या जिले के स्तर पर ही आसानी से सुलझाया जा सकता था। सभी संबंधित अधिकारी इस विवाद को निपटाने में पूरी तरह विफल रहे।
ऐसी नौबत कभी नहीं आनी चाहिए कि अपने ही विभाग के पुलिसकर्मियों को मुख्यालय आकर घेराव करना पड़े। आयुक्त ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे अपने अधीनस्थों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखें, उनकी समस्याओं को सुनें और यथासंभव उनका समाधान समय पर करें।
सोमवार को प्रदर्शन समाप्त होने के बाद पुलिस आयुक्त ने आदर्श आडिटोरियम में प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों को बुलाकर उनकी समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान एक के बाद एक दर्जनों पुलिसकर्मियों ने अपनी-अपनी पीड़ा रखी। बैठक में एक महिला सब-इंस्पेक्टर ने रोते हुए बताया कि प्रदर्शन में शामिल होने के बाद एक वकील द्वारा उन्हें धमकी भरे मैसेज भेजे जा रहे हैं।
महिलाकर्मी ने आरोप लगाया कि उन्हें गंदी-गंदी गालियां दी जा रही हैं और कोर्ट आने पर सबक सिखाने की धमकी दी जा रही है। महिलाकर्मी की बात सुनकर पुलिस आयुक्त ने उन्हें पूरा सुरक्षा और न्याय का भरोसा दिया।आयुक्त का मानना है कि यदि जिला और रेंज स्तर पर ही पुलिसकर्मियों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाता, तो उन्हें इस तरह की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

